राजगढ़ बनेगा लहसुन का हब, 7 जिलों की खेती और बाजार को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म
- राजेंद्र यादव, ब्यूरो चीफ, मध्यप्रदेश
- Nov 03, 2026
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उद्यानिकी कमिश्नर श्री सौरभ कुमार सुमन ने ली हाईलेवल बैठक, तीन महीने में तैयार होगी हाइब्रिड डीपीआर किसानों को खेत से ही खरीद और बायबैक का मिलेगा प्रस्ताव
मोहनपुरा - कुंडालिया प्रेशराइज्ड सिंचाई परियोजना से जिले के खेतों तक पानी पहुंचने के बाद अब राजगढ़ में खेती का स्वरूप बदलने की तैयारी है। परंपरागत खेती के स्थान पर आधुनिक और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले को लहसुन उत्पादन के बड़े क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। खास बात यह है कि इस क्लस्टर से आसपास के 6 से 7 जिलों को भी जोड़ा जाएगा। यानी राजगढ़ आने वाले समय में न केवल लहसुन उत्पादन का केंद्र बनेगा, बल्कि यहां से उन्नत किस्मों, उत्पादन की गुणवत्ता और बाजार की संभावनाओं को भी नई दिशा मिलेगी। इसी रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए मंगलवार को मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना कार्यालय में उद्यानिकी कमिश्नर श्री सौरभ कुमार सुमन ने अधिकारियों, सिंचाई परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों और निजी कंपनियों के साथ हाईलेवल बैठक की। बैठक में लहसुन की खेती शुरू करने से पहले विस्तृत डीपीआर तैयार करने, किसानों को संगठित करने, आधुनिक खेती के लिए समूह बनाने, एफपीओ विकसित करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार मूल्य दिलाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, परियोजना प्रशासक श्री विकास राजोरिया, श्री शुभंकर विश्वास, उद्यानिकी उपसंचालक श्री वी.एस. मीणा, श्री नीरज रेवाड़ी, श्री संदीप दुबे सहित एलएंडटी और जैन इरिगेशन के अधिकारी मौजूद रहे।
*हाइब्रिड डीपीआर से तय होगी खेती की दिशा*
लहसुन क्लस्टर विकसित करने के लिए हाइब्रिड डीपीआर तैयार की जाएगी। इसके लिए एक निजी संस्था को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि एलएंडटी और जैन इरिगेशन मैदानी स्तर पर सहयोग करेंगे। मोहनपुरा - कुंडालिया परियोजना से सिंचित क्षेत्र का विस्तृत डाटा जुटाया जाएगा। इसमें कांट्रैक्ट फार्मिंग करने वाले किसानों के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से खेती करने वाले किसानों को भी शामिल किया जाएगा। इसके आधार पर उपयुक्त क्षेत्र, किसानों की संख्या, उत्पादन क्षमता और संसाधनों का आकलन होगा।
*तीन महीने में तैयार करें बेहतर डीपीआर*
कमिश्नर श्री सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना जिले के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। इतनी बड़ी सिंचाई सुविधा का लाभ केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कृषि में ग्रॉस वैल्यू एडिशन भी होना चाहिए। इसके लिए समयबद्ध तरीके से काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को तीन महीने में उपयुक्त क्षेत्र का चयन कर बेहतर डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों की मजबूत नेटवर्किंग विकसित की जा सके। इसी आधार पर भविष्य की योजनाएं तैयार होंगी।
*प्रोफेशनल टीम करेगी काम, एफपीओ को भी जोड़ेंगे*
कमिश्नर श्री सौरभ कुमार सुमन ने स्पष्ट किया कि राजगढ़ को लहसुन का हब बनाने के लिए पेशेवर तरीके से काम करना होगा। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई जाएगी। स्थानीय स्तर पर अनुभवी लोगों को जोड़ा जाएगा और फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) को मजबूत किया जाएगा। अगले छह महीने में किसानों को एकजुट कर नए वित्तीय वर्ष में योजना को जमीन पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चार महीने विभागीय स्तर पर मजबूती से काम करना होगा। इसके बाद योजना को ऑटो मोड पर संचालित करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। भविष्य में कई अन्य क्लस्टर भी विकसित किए जाएंगे। फिलहाल राजगढ़ में इसे ट्रायल के रूप में शुरू किया जा रहा है।
*किसानों को मिलेगा बायबैक ऑफर, खेत से खरीदी का प्रस्ताव*
किसानों का लहसुन की खेती के प्रति डर दूर करने के लिए कमिश्नर श्री सौरभ कुमार सुमन ने जैन इरिगेशन के अधिकारियों से बायबैक मॉडल पर काम करने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को भरोसा दिलाया जाए कि वे लहसुन की फसल लगाएंगे तो कंपनी खेत से ही उपज खरीदेगी। इसके लिए तीन दिन के औसत मंडी भाव के आधार पर भुगतान का प्रस्ताव रखा जाए, ताकि किसानों को मंडी तक उपज ले जाने की परेशानी से राहत मिल सके। कमिश्नर श्री सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि लहसुन की खेती में जोखिम जरूर है, लेकिन इसके साथ अच्छी कमाई की संभावनाएं भी हैं। मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना में ऑटोमेशन आधारित सिंचाई व्यवस्था होने से किसानों को बेहतर उत्पादन का अवसर मिलेगा। किसानों का भरोसा जीतना और उनकी उपज के लिए बाजार सुनिश्चित करना इस मिशन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
*राजगढ़ से तय होंगी वैरायटी और बाजार की संभावनाएं*
कमिश्नर श्री सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि राजगढ़ को केवल लहसुन उत्पादन का क्लस्टर नहीं बनाना है, बल्कि ऐसा केंद्र विकसित करना है जहां से उन्नत किस्मों, उत्पादन की गुणवत्ता और बाजार की दिशा तय हो सके। इस क्लस्टर में आसपास के 6 से 7 जिलों को जोड़ने की योजना है। उद्देश्य है कि यहां तैयार होने वाली उपज को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सके।
*लहसुन नहीं, विश्वस्तरीय प्रोडक्ट तैयार करना लक्ष्य*
कमिश्नर श्री सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि लहसुन की खेती तो किसान पहले से करते आ रहे हैं, लेकिन अब किस्मों और गुणवत्ता पर विशेष काम करना होगा। ऐसी वैरायटी विकसित करनी होगी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग हो। इसके लिए चीन के मॉडल से सीखने और बेहतर उत्पादन तकनीक अपनाने की जरूरत है। उन्होंने पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि केवल अच्छा उत्पादन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि फसल की ग्रेडिंग, भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था भी तैयार करनी होगी। गुणवत्ता बेहतर होगी तो विश्वस्तरीय बाजार में राजगढ़ की पहचान बन सकेगी।
*एमपी में उद्यानिकी ही भविष्य*
कमिश्नर श्री सौरभ कुमार सुमन ने कहा कि मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में उद्यानिकी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रदेश को विकास की नई ऊंचाई पर ले जाना है तो उद्यानिकी आधारित खेती पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों में जलगांव, पटना और नीमच सहित विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर वहां की खेती और उत्पादन व्यवस्था का अध्ययन किया गया है।
*सब्सिडी नहीं, डिमांड आधारित खेती पर जोर*
कमिश्नर श्री सौरभ कुमार सुमन ने अधिकारियों से कहा कि किसानों का वास्तविक कल्याण केवल सब्सिडी बांटने से नहीं होगा। इसके लिए बाजार की मांग के अनुसार खेती को बढ़ावा देना जरूरी है। जिस उत्पाद की जितनी मांग हो, उसी के अनुरूप उत्पादन की योजना बनाई जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। राजगढ़ लहसुन क्लस्टर का उद्देश्य भी यही है कि उत्पादन, गुणवत्ता, प्रसंस्करण और बाजार को एक ही व्यवस्था से जोड़ा जाए।


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