ब्यावरा में संघ शिक्षा वर्ग का प्रकटोत्सव कार्यक्रम संपन्न उपस्थित लोगों ने देखा अनुशासन और संगठन का अद्भुत प्रदर्शन
- राजेंद्र यादव, ब्यूरो चीफ, मध्यप्रदेश
- May 31, 2026
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ब्यावरा, राजगढ़ । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यभारत प्रांत के 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का प्रकटोत्सव कार्यक्रम रविवार को ब्यावरा में भव्य रूप से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों के अनुशासित प्रदर्शन, सामूहिक व्यायाम, दंड संचालन, योग एवं शारीरिक कौशल ने उपस्थित हजारों लोगों को प्रभावित किया। घोष की मधुर धुन और स्वयंसेवकों की एकरूपता ने पूरे आयोजन को आकर्षण का केंद्र बना दिया।
संघ शिक्षा वर्ग 16 मई से ब्यावरा में संचालित हो रहा था, जिसका प्रकट कार्यक्रम रविवार को आयोजित किया गया। वर्ग का औपचारिक समापन 1 जून को दीक्षांत समारोह के साथ होगा। इस प्रशिक्षण वर्ग में मध्यभारत प्रांत के 31 जिलों के 138 शाखा स्थानों से आए 200 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इनमें किसान, व्यापारी, शिक्षक, अधिवक्ता, इंजीनियर सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल रहे। सभी स्वयंसेवक स्वयं के व्यय से प्रशिक्षण प्राप्त करने पहुंचे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती के चित्र पर पुष्प अर्पण कर किया गया। मंच पर मुख्य अतिथि मानस मर्मज्ञ पंडित कपिल शर्मा (नीलगिरि आश्रम), वर्ग सर्वाधिकारी योगेश गौतम, जिला संघ चालक महेश यादव तथा मुख्य वक्ता प्रांत कार्यवाह हेमंत सेठिया उपस्थित रहे। वर्ग कार्यवाह कदम सिंह मीणा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत कर प्रशिक्षण वर्ग की गतिविधियों एवं उद्देश्यों की जानकारी दी।
मुख्य वक्ता हेमंत सेठिया ने कहा कि संगठित समाज ही हर चुनौती का सामना करने में सक्षम होता है। व्यक्ति कितना भी श्रेष्ठ क्यों न हो, समाज की सामूहिक शक्ति के बिना बड़े परिवर्तन संभव नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण है, जहां शाखा के माध्यम से संस्कारित, अनुशासित एवं राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाले व्यक्तित्व का निर्माण किया जाता है।
उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग केवल शारीरिक प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि जीवन निर्माण की प्रयोगशाला है। यहां समयपालन, अनुशासन, सेवा, समरसता, आत्मीयता एवं टीम भावना जैसे जीवन मूल्यों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। स्वयंसेवक यहां प्राप्त संस्कारों को समाज जीवन में उतारने का प्रयास करता है। अपने उद्बोधन में उन्होंने विकसित भारत के संकल्प, सामाजिक समरसता, स्वदेशी चिंतन और भारतीय जीवन मूल्यों पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत विश्व मंच पर नई भूमिका में आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है।
कार्यक्रम की विशेषता पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत का संदेश भी रहा। आयोजन को पॉलीथिन मुक्त रखा गया तथा सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। भोजन निर्माण में गोबर के कंडों और लकड़ी का उपयोग किया गया। वहीं बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक परिवहन, साइकिल, पैदल एवं इलेक्ट्रिक वाहनों से कार्यक्रम स्थल पहुंचे, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी समाज तक पहुंचा। प्रकट कार्यक्रम के माध्यम से संघ ने अनुशासन, संगठन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण जागरूकता एवं राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को समाज के सामने प्रस्तुत किया।


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