भिवंडी के किसानों को गिरणी कामगारों की तरह बर्बाद नहीं होने देंगे

गोदामों पर कार्रवाई के बीच पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कपिल पाटील का बड़ा बयान, विरोधियों पर भी साधा निशाना


भिवंडी। भिवंडी तालुका में गोदामों पर कार्रवाई और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कपिल पाटील ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण हटाए जाने चाहिए, लेकिन भिवंडी के भूमिपुत्र किसानों ने आर्थिक विकास और रोजगार के लिए जो गोदाम खड़े किए हैं, उन्हें उनका पूरा समर्थन रहेगा। कपिल पाटील ने कहा, “भिवंडी के किसानों को मुंबई के गिरणी कामगारों की तरह बर्बाद नहीं होने देंगे। किसानों की रोजीरोटी बचाने के लिए हम हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे।” पिंपलास क्षेत्र में कथित 23 एकड़ सरकारी जमीन पर बने गोदामों के विवाद को लेकर आयोजित पत्रकार परिषद में कपिल पाटील ने कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित 23 एकड़ जमीन वास्तव में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं। बिना तथ्य सामने आए केवल आरोप लगाकर राजनीतिक प्रसिद्धि हासिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विरोधियों पर हमला बोलते हुए कहा कि “हर बार मुझ पर आरोप लगाकर कुछ लोग चर्चा में आने का प्रयास करते हैं। जब वर्ष 2007 में भिवंडी तालुका को मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण में शामिल किया गया था, तब आरोप लगाने वालों का राजनीतिक अस्तित्व भी नहीं था।” कपिल पाटील ने बताया कि उस समय उन्होंने जिला परिषद में रहते हुए किसानों की बैठकें लेकर एमएमआरडीए के कारण होने वाले बदलावों की जानकारी दी थी। हालांकि वर्ष 2007 से दिसंबर 2014 तक एमएमआरडीए की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहली बार विकास आराखड़ा घोषित करते हुए भिवंडी में अंतरराष्ट्रीय स्तर का लॉजिस्टिक पार्क बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद क्षेत्र में गोदाम और लॉजिस्टिक व्यवसाय तेजी से बढ़ा। कपिल पाटील ने कहा कि उन्होंने और अन्य जनप्रतिनिधियों ने समय-समय पर अनधिकृत गोदामों को नियमित करने की मांग की, क्योंकि यह हजारों किसानों और स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़ा विषय है। उन्होंने विरोधियों पर पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग उन्हें “गोदामों की जननी” बता रहे हैं, उन्होंने खुद अपने कथित अनधिकृत गोदामों और निर्माणों को बचाने के लिए अदालत से स्थगन आदेश लिया था। इससे यह साबित होता है कि उनके खुद के निर्माण भी नियमों के दायरे में नहीं थे। कपिल पाटील ने कहा, “एक तरफ आरोप लगाना और दूसरी तरफ खुद ही अदालत से राहत लेना, यह राजनीतिक दोहरेपन और झूठ का सबसे बड़ा उदाहरण है।” गोदामों पर कार्रवाई के मुद्दे को लेकर भिवंडी की राजनीति गर्मा गई है और किसानों तथा गोदाम व्यवसाय से जुड़े लोगों में भी भविष्य को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है।

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