भिवंडी मनपा में ‘ नालों का महाघोटाला’

तीन साल में 92 से बढ़कर 235 हुए नाले

2.44 करोड़ की सफाई पर उठे सवाल

 मानसून से पहले मनपा की नींद खुली

भिवंडी। मानसून सिर पर है और भिवंडी निजामपुर महानगरपालिका ने आखिरकार नाला सफाई अभियान शुरू कर दिया है। लेकिन इस बार सफाई से ज्यादा चर्चा करोड़ों के ठेकों और “अचानक पैदा हुए नालों” की हो रही है। शहर में इस वर्ष 2 करोड़ 44 लाख 67 हजार रुपये खर्च कर नाला सफाई कराई जाएगी। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 16 लाख 79 हजार 166 रुपये अधिक खर्च किए जा रहे हैं।

मौसम विभाग ने 7 जून के आसपास मानसून आने की संभावना जताई है। ऐसे में मनपा प्रशासन ने शहर के विभिन्न प्रभागों में सफाई कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन नालों की संख्या में रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। मनपा के दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2024 में शहर में केवल 92 नाले दर्ज थे। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 135 हो गई और अब वर्ष 2026 में मनपा ने शहर में 235 नाले होने का दावा किया है। यानी महज तीन वर्षों में रिकॉर्ड में 143 नए नाले जुड़ गए। इस खुलासे के बाद शहर में “नाले बढ़े या खेल बढ़ा ?” जैसी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मनपा प्रशासन द्वारा जारी ठेकों के अनुसार प्रभाग समिति क्रमांक-01 के अंतर्गत 21 नालों की 11,390 मीटर लंबाई की सफाई का ठेका मैसर्स सुजित बालासाहेब खरात को 40 लाख 72 हजार 731 रुपये में दिया गया है। वहीं इसी कंपनी को प्रभाग समिति क्रमांक-03 के 42 नालों की 16,550 मीटर लंबाई की सफाई का कार्य 40 लाख 71 हजार 115 रुपये में सौंपा गया है।

चंडिका कन्स्ट्रक्शन कंपनी को प्रभाग समिति क्रमांक-02 तथा 05 का काम मिला है। प्रभाग समिति क्रमांक-02 के 28 नालों की 13,970 मीटर लंबाई की सफाई के लिए 39 लाख 99 हजार 958 रुपये और प्रभाग समिति क्रमांक-05 के 43 नालों की 6,630 मीटर लंबाई की सफाई के लिए 39 लाख 78 हजार 733 रुपये का ठेका दिया गया है।

इसी तरह प्रभाग समिति क्रमांक-04 के अंतर्गत आने वाले 15 नालों की 9,034 मीटर लंबाई की सफाई का ठेका बुबेरे एंड असोसिएट कंपनी को 43 लाख 91 हजार 768 रुपये में मिला है। जबकि शहर की मुख्य सड़कों के 86 नालों की सफाई का कार्य राहुल इंटरप्राइसेस, उल्हासनगर को 39 लाख 52 हजार 997 रुपये में सौंपा गया है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में 135 नालों की सफाई के लिए 2 करोड़ 27 लाख 97 हजार 136 रुपये खर्च किए गए थे, जो वर्ष 2024 की तुलना में करीब 5.60 प्रतिशत अधिक था। अब 2026 में नालों की संख्या बढ़ाकर 235 कर दी गई और खर्च भी बढ़ाकर 2.44 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचा दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ये अतिरिक्त 143 नाले कहां से आए? क्या शहर में अचानक नए नाले बन गए या फिर कागजों में संख्या बढ़ाकर करोड़ों रुपये के ठेके जारी किए जा रहे हैं?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान शहर जलमग्न हो जाता है, बावजूद इसके नाला सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है। वर्ष 2025 में प्रशासन की कथित निष्क्रियता और इस वर्ष अचानक बढ़ी सक्रियता ने भी मनपा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरे मामले में मनपा प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। पारदर्शिता के अभाव में अब यह मुद्दा शहर की राजनीति और नागरिकों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बनता जा रहा है। मानसून आने में कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन करोड़ों की सफाई और बढ़ते नालों का रहस्य अब भी बरकरार है।

रिपोर्टर

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