भिवंडी मनपा को 25 वर्षो में भी नही नसीब हुआ शिक्षणाधिकारी,अभिभावकों में बढ़ी चिंता

◾ डेढ़ लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा  असर,बढ़ रहा अवैध स्कूलों की संख्या

◼️मांग के बावजूद प्रशासन की तरफ से नही मिल रहा प्रशासनाधिकारी न ही शिक्षणाधिकारी


भिवंडी। नपा से मनपा में तब्दील हुए 25 साल बीतने के बावजूद भिवंडी मनपा शिक्षण विभाग को अभी तक शिक्षणाधिकारी नसीब नही हुआ है।इतना ही नही मनपा शिक्षण मंडल के संचालित स्कूल पिछले छह माह से प्रभारी प्रशासनाधिकारी चला रहे है।जिसका असर मनपा अंतर्गत आने वाले एक लाख 52 हजार बच्चों पर पड़ रहा है।मनपा प्रशासन के बार बार मांग के बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षणाधिकारी अथवा प्रशासनाधिकारी की नियुक्ति नहीं की जा रही है।जिससे मनपा का स्कूलों के शिक्षा का स्तर जहां दिनों दिन गिरताजा रहा है।वही अवैध विद्यालयों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है।साथ ही पढ़ाई की कमी के कारण मनपा स्कूलो में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों में उनके भविष्य को लेकर चिंता व्याप्त है। 

◼️मनपा क्षेत्र में चल रहे 312 स्कूल

 भिवंडी मनपा अंतर्गत क्षेत्र में कुल 312 स्कूल चल रहे है।जिसमे से 107 स्कूल मनपा द्वारा संचालित है।जिसमे पहली से आठवीं तक 96 व नौंवी व दसवीं की 11 स्कूल है।इसके अलावा 61 अनुदानित तथा 21 बिना अनुदानित स्कूल चल रहे है।जबकि 124 इंग्लिश माध्यम के विद्यालय शहर में संचालित है।इन सभी स्कूलों में कुल एक लाख 52 हजार बच्चे शिक्षा ग्रहण करते है जिन्हें शिक्षित करने के लिए 3834 शिक्षक कार्यरत है।जबकि भिवंडी मनपा के पहली से आठवीं तक विभिन्न माध्यम के कुल 97 विद्यालयों में कुल 25 हजार 232 बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते है।जिन्हें शिक्षित करने के लिए मनपा में 757 शिक्षक कार्यरत है।भिवंडी मनपा शिक्षण मंडल के प्रशासनाधिकारी का पद जनवरी 2020 के अंत से खाली पड़ा है।इस पद पर मुख्याध्यापक को प्रमोशन देकर प्रशासनाधिकारी बनाया गया है।जिसके विद्यालय संचालन का कोई ज्ञान नहीं है।क्योंकि प्रशासन की तरफ से अभी तक नए प्रशासनाधिकारी कि नियुक्ति नही की गई।जबकि शिक्षणाधिकारी के अभाव में मनपा उपायुक्त स्वपना वसावे शिक्षण विभाग का काम काज देख रही है।जिनसे बात करने पर उन्हें मनपा अंतर्गत क्षेत्र में कितने स्कूल संचालित है व इसमें कितने बच्चे पढ़ते है इसका भी ज्ञान नहीं है।इस कारण मनपा शिक्षण व्यवस्था दिनों दिन बदतर होती जा रही है।हालांकि नियमतः भिवंडी मनपा शिक्षण विभाग में प्रशासनाधिकारी की जगह शिक्षणाधिकारी की नियुक्ति होने चाहिए।मनपा शिक्षण मंडल के सूत्रों के अनुसार भिवंडी में शिक्षण विभाग में शिक्षणाधिकारी की नियुक्ति की मांग लगातार की जा रही है।लेकिन प्रशासन द्वारा शिक्षणाधिकारी तो दूर प्रशासनाधिकारी भी नही रहा है।

बेलगाम हुई शिक्षण व्यवस्था

पब्लिक रिपब्लिकन पार्टी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष अब्दुल गनी खान का कहना है कि भिवंडी मनपा प्रशासन की अनदेखी के कारण शहर में शिक्षण व्यवथा डामाडोल हो गया है। स्कूलों में बच्चों को शिक्षा देने वाले शिक्षक अपनी मर्जी के हो गए है।जब उनकी मर्जी आते है।जब मर्जी जाते है।उनका कहना है कि यही कारण है कि मनपा शिक्षण विभाग हर वर्ष अवैध स्कूलों की सूची निकलता है।लेकिन उन पर कार्रवाई के अभाव में अवैध स्कूल बेखौफ चल रहे है।इतना ही नही अभिभावकों का आरोप है कि गरीबी के कारण लोग अपने बच्चो के निजी स्कूलों में न दाखला न दिला पाने के कारण मनपा स्कूलों में नाम लिखते है।लेकिन यहां पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है।इस कारण उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट