भिवंडी मनपा चुनाव से पहले राकांपा (शरद) को बड़ा झटका

कांग्रेस के बागी पूर्व उपमहापौर समेत चार अपात्र नगरसेवक सपा में शामिल


भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका चुनाव से पहले शहर की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) को जोरदार झटका देते हुए कांग्रेस के बागी पूर्व उपमहापौर अहमद सिद्दीकी सहित चार अपात्र नगरसेवकों को अपने खेमे में शामिल कर लिया है। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक दलों में तोड़फोड़ और जोड़तोड़ का सिलसिला तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी की मौजूदगी में अहमद सिद्दीकी, शबनम महबूब अंसारी, नमरा औरंगजेब अंसारी और अंजुम अहमद सिद्दीकी ने औपचारिक रूप से सपा की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी नेतृत्व ने सभी नेताओं का स्वागत करते हुए इसे भिवंडी की राजनीति में सपा की बढ़ती ताकत का संकेत बताया।

2019 की बगावत से शुरू हुई सियासी कहानी ......

गौरतलब है कि वर्ष 2019 में हुए भिवंडी मनपा के महापौर चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी में बड़ी बगावत हुई थी। कांग्रेस से जुड़े 18 नगरसेवकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान करते हुए कोणार्क विकास आघाड़ी के उम्मीदवार को समर्थन दिया था, जिसके चलते अहमद सिद्दीकी उपमहापौर बने थे।इस बगावत के बाद अहमद सिद्दीकी समेत सभी 18 नगरसेवकों ने कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) में प्रवेश किया था। हालांकि दल-बदल कानून के तहत इन्हें छह वर्षों के लिए चुनाव लड़ने से अपात्र घोषित कर दिया गया था, जिससे इन नेताओं की सक्रिय राजनीति पर ब्रेक लग गया।

गठबंधन की अनिश्चितता बनी वजह.........

वर्तमान में भिवंडी मनपा चुनाव को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद) और समाजवादी पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा तो हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, गठबंधन की अनिश्चितता और सपा के लगातार मजबूत होते जनाधार को देखते हुए इन अपात्र नगरसेवकों ने समाजवादी पार्टी का रुख किया है। इन नेताओं का मानना है कि भिवंडी में सपा का संगठनात्मक ढांचा मजबूत है और विधायक रईस शेख के नेतृत्व में पार्टी लगातार विस्तार कर रही है, जिससे भविष्य में राजनीतिक पुनर्वास की संभावनाएं ज्यादा नजर आ रही हैं।

सपा को बढ़त, राकांपा (शरद) की मुश्किलें बढ़ीं.......

इन नेताओं के सपा में शामिल होने से राकांपा (शरद) को बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। पहले से ही सीमित संगठन और कार्यकर्ताओं की कमी से जूझ रही राकांपा (शरद) के लिए यह घटनाक्रम मनपा चुनाव से पहले नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, सपा को इसका सीधा लाभ मिलता नजर आ रहा है। मुस्लिम बहुल प्रभागों में इन नेताओं की व्यक्तिगत पकड़ और राजनीतिक अनुभव सपा की चुनावी रणनीति को और धार दे सकता है।

आने वाले दिनों में और उलटफेर संभव......

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जैसे-जैसे नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आएगी, भिवंडी की राजनीति में और भी बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। कई छोटे-बड़े नेता अपने-अपने राजनीतिक भविष्य को देखते हुए नए सिरे से समीकरण साधने में जुटे हैं।भिवंडी मनपा चुनाव अब केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्र में सपा, कांग्रेस, भाजपा-शिवसेना और राकांपा (शरद) के बीच राजनीतिक शक्ति परीक्षण बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि किस दल की रणनीति मतदाताओं को सबसे ज्यादा प्रभावित कर पाती है।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट