भिवंडी में सरकारी इमारतों का ध्वस्तीकरण तेज़, सुरक्षा लापरवाही पर बढ़ा विवाद

भिवंडी। भिवंडी में इन दिनों महानगर पालिका प्रशासन ने सरकारी इमारतों, पानी की टंकियों, स्कूलों और सार्वजनिक शौचालयों समेत कई ढांचों को तोड़ने की मुहिम तेज़ कर दी है। मगर इस कार्रवाई के बीच सुरक्षा इंतज़ामों की अनदेखी और ठेकेदार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पालिका का लाखों रुपये बकाया होने के बावजूद हर बार ध्वस्तीकरण का ठेका उसी कॉन्ट्रैक्टर को दिया जा रहा है, जो अब शहर में “भंगार माफिया” के रूप में चर्चित है। नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ठेकेदार बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम के इमारतें गिरा रहा है। न तो चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं, न ही मजदूरों को सेफ्टी कीट दिया जा रहा है। कई बार इमारत के आसपास भीड़ मौजूद रहने के बावजूद भारी मशीनें चला दी जाती हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है, पालिका सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार पर प्रशासन का लाखों रुपये बकाया है, फिर भी उसे लगातार ऐसे ठेके दिए जा रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि यह सिर्फ काम की गति का मामला है या फिर ठेकेदार और पालिका के बीच कोई गुप्त समझौता? क्षेत्र के नागरिक संगठनों ने ठेकेदार के खिलाफ जांच और पालिका अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की मांग की है। सहायक आयुक्त बालाराम जाधव का कहना है कि पानी की टंकी तोड़ने का ठेका पानी सप्लाई विभाग ने जारी किया है। “किसका ठेका है और कौन तोड़ रहा है, इसकी जानकारी हमारे पास नहीं है,” उन्होंने कहा। फिलहाल, पालिका प्रशासन ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि बढ़ते दबाव को देखते हुए जल्द ही इस मुद्दे पर बैठक बुलाई जा सकती है।

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