नालों की सफाई में फिर दोहराया जाएगा भ्रष्टाचार का खेल ?
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- May 06, 2025
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भिवंडी में अनुभवहीन ठेकेदारों को फिर मिला करोड़ों का ठेका, सवालों के घेरे में पालिका प्रशासन
भिवंडी। हर साल मानसून से पहले भिवंडी में नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन नतीजा वही—हर बार शहर के निचले इलाकों में जलजमाव और नागरिकों को भारी नुकसान। इस वर्ष भी भिवंडी पालिका प्रशासन ने अनुभवहीन और विवादित ठेकेदारों को नाला सफाई का ठेका देकर भ्रष्टाचार की कहानी को फिर से दोहराने की तैयारी कर ली है। इस बार नालों की सफाई के लिए कुल 2 करोड़ 27 लाख 97 हजार 136 रुपये का ठेका पांच ठेकेदारों को दिया गया है। इसमें तीन पुराने ठेकेदारों के साथ दो नए नाम भी शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि छह में से दो ठेके गायकवाड़ कंपनी के पास गए हैं। वहीं उल्हासनगर की एक कंपनी को पहली बार नालों की सफाई का जिम्मा सौंपा गया है।
ठेकों का ब्योरा कुछ इस प्रकार है:
1) प्रभाग समिति क्रमांक 1 (21 नाले): मे. राहुल इंटरप्रायजेस, उल्हासनगर - 40,56,945 रूपये
2) प्रभाग समिति क्रमांक 2 (16 नाले): मे. सुशिल एल. गायकवाड़ - 37,46,174 रूपये ।
3) प्रभाग समिति क्रमांक 3 (39 नाले): मे. बुबेरे एंड असोसिएट - 45,31,377 रूपये।
4) प्रभाग समिति क्रमांक 4 (19 नाले): मे. साई कन्स्ट्रक्शन, उल्हासनगर - 34,24,374 रूपये।
5) प्रभाग समिति क्रमांक 5 (40 नाले): मे. चंडिका कन्स्ट्रक्शन - 38,82,593 रूपये
6) मुख्य सड़क गटर सफाई: सुशिल एल. गायकवाड़ - 31,66,529 रूपये।
गौर करने वाली बात यह है कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में ठेका राशि 5,60,640 रूपये अधिक है, जबकि ठेकेदार वही पुराने और काम का तरीका वही सवालों से घिरा हुआ।
नालों की संख्या बढ़ी, लेकिन रिकॉर्ड नहीं ::::
इस बार 135 नालों की सफाई का दावा किया गया है, जबकि पिछले वर्षों में केवल 92 नाले ही पालिका रिकॉर्ड में दर्ज थे। यानी 43 नाले अचानक कहां से आ गए और ये कहां स्थित हैं—इसका कोई स्पष्ट जवाब पालिका प्रशासन के पास नहीं है।
प्रभाग समिति अनुसार नालों की वृद्धि: :::
1) प्रभाग क्रमांक 1: 17 से बढ़कर 21
2) प्रभाग क्रमांक 2: 14 से बढकर 16
3) प्रभाग क्रमांक 3: 26 से बढ़कर 39
4) प्रभाग क्रमांक 4: 13 से बढ़कर 19
5) प्रभाग क्रमांक 5: 22 से बढ़कर 40
शहर की दक्ष नागरिकों की माने तो इस तरह नालों की संख्या में हुई यह रहस्यमयी वृद्धि भी जांच का विषय बन चुकी है। हर साल नालों की सफाई के नाम पर मोटी रकम खर्च की जाती है, लेकिन परिणामस्वरूप पानीभराव और जनता को परेशानी ही मिलती है। इस बार भी सफाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में शहर को जलजमाव से राहत मिलेगी।


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