सपने बड़े देखिए, परिस्थितियों से मत हारिए राजगढ़ के युवाओं को कलेक्टर डॉ. मिश्रा – पुलिस अधीक्षक श्री तोलानी ने बताया सफलता का मंत्र
- राजेंद्र यादव, ब्यूरो चीफ, मध्यप्रदेश
- Nov 04, 2026
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राजगढ़
किसी छोटे गांव या कस्बे में बैठकर देखा गया सपना भी देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच सकता है। जरूरत है तो बस उसे पूरा करने के जुनून, सही दिशा और निरंतर मेहनत की। इसी विश्वास को मजबूत करने के लिए राजगढ़ जिला प्रशासन युवाओं को सिविल सेवाओं के लिए तैयार करने की पहल कर रहा है। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजगढ़ में आयोजित दो दिवसीय सिविल सेवा मार्गदर्शन कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा और पुलिस अधीक्षक श्री अमित तोलानी ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। अधिकारियों ने केवल परीक्षा की तैयारी के सूत्र ही नहीं बताए, बल्कि अपने जीवन के संघर्ष, असफलताओं, अनुभवों और सफलता की वास्तविक कहानियां साझा कर विद्यार्थियों में नया आत्मविश्वास जगाया।
कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने सुनाई अपनी संघर्ष यात्रा, बोले– परिस्थितियों के गुलाम नहीं, अपने सपनों के मालिक बनिए*
कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता के लिए संसाधनों से अधिक मजबूत इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है। परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को उनका गुलाम नहीं बनना चाहिए। प्रसिद्ध पुस्तक द अलकेमिस्ट के लेखक पाउलो कोएल्हो की कहानी का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पेन के एक गांव के चरवाहे का उदाहरण दिया, जो पूरी दुनिया देखने और खजाने की तलाश में लंबी यात्रा पर निकलता है। उन्होंने कहा कि बड़ा सपना देखने के साथ उसे पूरा करने का साहस और संकल्प भी होना चाहिए। दशरथ मांझी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह एक व्यक्ति ने 22 वर्षों तक पहाड़ काटकर रास्ता बनाया। वहीं महान बास्केटबॉल खिलाड़ी माइकल जॉर्डन की असफलताओं और संघर्ष का उल्लेख कर समझाया कि अस्वीकृति और असफलता को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की ताकत बनाना चाहिए। अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने बताया कि पिता का निधन जल्दी हो जाने के कारण परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके सामने थीं। उन्होंने बिना कोचिंग के किताबों से स्वयं अध्ययन किया और वरिष्ठ अधिकारियों से पुस्तकें लेकर अपनी तैयारी जारी रखी।
उन्होंने बताया कि एक बार साक्षात्कार में 90 अंक मिलने के बावजूद उनका चयन नहीं हो सका। उस असफलता से वे बेहद निराश हुए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। एमपीपीएससी, बिहार पीएससी और यूपीपीएससी सहित विभिन्न परीक्षाओं में प्रयास जारी रखे। ऑल इंडिया फॉरेस्ट सर्विस में तीसरी रैंक प्राप्त की और अंततः तीसरे प्रयास में 69वीं रैंक हासिल कर अपना लक्ष्य प्राप्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि रास्ता सही है और लक्ष्य स्पष्ट है, तो सीमित संसाधनों को अपनी असफलता का कारण न बनने दें। अनावश्यक विचारों को छोड़कर अपनी पूरी ऊर्जा लक्ष्य की प्राप्ति में लगाएं।
*एक छोटी सी मदद भी किसी के जीवन की दिशा बदल सकती है*
कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने अपने प्रशासनिक जीवन के दो प्रेरक प्रसंग भी साझा किए। उन्होंने बताया कि छतरपुर में तहसीलदार रहते हुए एक विद्यार्थी उनसे मिलने आया था। उसके पास आने-जाने तक के पैसे नहीं थे, लेकिन सिविल सेवा में जाने का उसका जुनून इतना मजबूत था कि वह मार्गदर्शन लेने पहुंचा। आज वही विद्यार्थी दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद डीएसपी बन चुका है। एक अन्य प्रसंग में उन्होंने बताया कि एक बच्चे के पिता आर्थिक स्थिति के कारण उसकी पढ़ाई बंद कराने वाले थे। बच्चे को स्कूल जाने के लिए साइकिल तक उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने बच्चे को साइकिल दिलवाई और उसकी पढ़ाई जारी रखने में सहयोग किया। कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने कहा कि किसी जरूरतमंद की शिक्षा जारी रखने में सहयोग करना और उसके सपनों को आगे बढ़ाना ही प्रशासनिक सेवा की वास्तविक संतुष्टि है।
*पुलिस अधीक्षक श्री तोलानी ने दिया सफलता का मंत्र – निरंतरता, अनुशासन और अच्छी संगति*
पुलिस अधीक्षक श्री अमित तोलानी ने विद्यार्थियों से कहा कि सिविल सेवा की तैयारी शुरू करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि वे इस सेवा में क्यों आना चाहते हैं। केवल क्या पढ़ना है, यह जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने लक्ष्य और उद्देश्य को समझना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि तैयारी के दौरान सफलता को लेकर मन में कई तरह के संशय आते हैं, लेकिन उनसे विचलित होने के बजाय प्रतिदिन के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें। निरंतरता सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासित दिनचर्या अपनाने, अच्छी संगति में रहने, आपस में प्रश्नों पर चर्चा करने, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करने और नियमित अभ्यास करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चाय की टपरी पर समय बिताने के बजाय अपने मित्रों के साथ पढ़ाई और विषयों पर सार्थक चर्चा करें।
*विद्यार्थियों को मिला खुला मंच, हर सवाल का मिला जवाब*
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अधिकारियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने विद्यार्थियों को बिना किसी संकोच के सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया और एक-एक प्रश्न का जवाब दिया। विद्यार्थियों ने यूपीएससी एवं एमपीपीएससी की तैयारी, आंसर राइटिंग, वैकल्पिक विषय का चयन, हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम, अध्ययन के घंटे, टाइम मैनेजमेंट और दिव्यांगजन आरक्षण जैसे विषयों पर सवाल पूछे। अधिकारियों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। प्रोफेसर डॉ. राम दांगी ने विद्यार्थियों से वरिष्ठ अधिकारियों के अनुभवों से सीखने और उनके मार्गदर्शन को आत्मसात करने का आह्वान किया। पुलिस अधीक्षक श्री तोलानी ने कहा कि प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, राजगढ़ से यदि एक भी विद्यार्थी सिविल सेवा में चयनित होता है तो यह पूरे महाविद्यालय के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय होगा।
*अब राजगढ़ में ही मिलेगी सिविल सेवा की तैयारी को नई दिशा*
जिला प्रशासन की यह पहल केवल दो दिवसीय प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में गठित सिविल सर्विसेज सोसायटी के माध्यम से विद्यार्थियों को UPSC, MPPSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नियमित मार्गदर्शन, विशेषज्ञों के व्याख्यान, प्रशासनिक अधिकारियों से संवाद, काउंसलिंग और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वी.बी. खरे के प्रयासों से शुरू हुई यह पहल जिले के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। क्योंकि प्रतिभा गांव या शहर नहीं देखती, सपनों की कोई सीमा नहीं होती और सफलता किसी एक पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती। राजगढ़ प्रशासन का यह प्रयास युवाओं को यही संदेश दे रहा है– अपनी परिस्थितियों से नहीं, अपने संकल्प से अपनी पहचान बनाइए। कल देश की प्रशासनिक सेवाओं में राजगढ़ के युवाओं का नाम भी चमक सकता है।


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