न मानक के अनुरूप अस्पताल न डिग्री के अनुसार इलाज

दुर्गावती संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय कि रिपोर्ट 


दुर्गावती (कैमूर) - वैसे तो मेडिकल विभाग की यदि बात करें तो चाहे वह इलाज का मामला हो या मेडिकल स्टोर चलाने वाले लोग या स्वास्थ्य जांच केंद्र पैथोलॉजी का मामला हो इन विभागों पर नकेल कसने में आज भी सरकार विफल है। आज के समय में डिग्री कुछ और का इलाज कुछ और बोर्ड पर नाम छपा है कुछ और का ऐसे डॉक्टर इलाज करते देखे जा रहे हैं ऐसे बोर्ड धारी डॉक्टर भी खुलेआम देखने को जगह-जगह मिलेंगे जिनका जांच करने वाला कोई भी नहीं है यह मस्त है और प्रशासन मौन है या मंथली टैक्स स्वास्थ्य विभाग के सीनियर पदाधिकारी को दिया जाता होगा। किराए पर लिए हुए छोटे-छोटे या मानक के विपरीत भवनों में चल रही डॉक्टरी में खुलेआम ऑपरेशन भी किया जा रहा है वह भी बुलावे पर अप्रशिक्षित डॉक्टरो के द्वारा। दवा विक्रेताओं पर कोई लगाम नहीं है मनमाने ढंग से गैर ब्रांडेड दवाइयां भी बिक रही है जिससे मरीजों के सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कहीं पैथोलॉजी में जांच का काम करके या सिख कर बिना डिग्री का जांच केंद्र खुले हुए दिखाई देते हैं इनका भी जांच करने वाला कोई नहीं है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कुछ चिकित्सा का कार्य कर रहे अस्पतालों की जांच हुई है लेकिन लगता है वह भी ठंडे बस्ते में चली जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के इन लापरवाहियों के चलते साधारण इलाज के क्रम में कभी कभी रोग बढ़ जाते हैं जिस कारण से लोगों की मौत भी हो जाती है और बड़े स्वास्थ्य पदाधिकारी या डॉक्टर  रोग के बिगड़ जाने पर जांच के बाद इलाज करने में असफल साबित होते हैं जिसके कारण रोगी की मौत हो जाती है। कंपाउंड्री करो डॉक्टर बन जाओ किसी का बोर्ड लगवा लो डिस्पेंसरी चलाओ यह फैशन बन गया है पैसा कहीं से आना चाहिए चाहे इसके लिए किसी की जान भी चली जाए कोई परवाह नहीं है ऐसे डॉक्टर भी मस्त है और प्रशासन बैठे पदाधिकारी भी मस्त है मजबूर जनता जाए तो जाए कहां उन्हें न डिग्री मांग कर चेक करने का अधिकार है न उनके प्रणाली की जांच करने की कोई विधि मालूम है।

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