आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ, सवा लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

संवाददाता सुचित पाण्डेय की रिपोर्ट 

दुर्गावती(कैमूर)-- चैनपुर के खरीगावा में भक्ति, शक्ति और लोक कल्याण की भावना के साथ कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत खरीगावा गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आज बुधवार को भव्य समापन हो गया। वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की पूर्णाहुति के साथ ही पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया। इस पावन अवसर पर उमड़े जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि आस्था की डोर सबसे मजबूत होती है। शाम 5 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1 लाख 30 हजार लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।

वैदिक अनुष्ठान और पूर्णाहुति

यज्ञ के अंतिम दिन सुबह से ही खरीगावा यज्ञ मंडप के आसपास भक्तों की भारी भीड़ जुटने लगी थी। विद्वान आचार्यों के निर्देशन में यजमानों ने पूर्ण विधि-विधान के साथ हवन कुंड में आहुतियां डालीं। दोपहर होते-होते 'लक्ष्मी नारायण भगवान की जय' और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष के बीच महायज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न हुई। जैसे ही अंतिम आहुति डाली गई, पूरा परिसर शंखध्वनि और घंटों की आवाज से गूंज उठा।

विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे मंत्री जमा खान

यज्ञ के समापन समारोह में बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. जमा खान ने भी शिरकत की। उन्होंने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की और क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों और यज्ञ समिति के सदस्यों ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। श्रद्धा के प्रतीक के रूप में लोगों ने मंत्री को स्मृति चिह्न और फोटो भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर मंत्री जमा खान ने कहा, "यज्ञ जैसे आयोजन समाज में प्रेम, भाईचारा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। खरीगावा की इस पवित्र भूमि पर उमड़ा यह जनसैलाब हमारी सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।"

प्रसाद वितरण: आस्था का महाकुंभ

पूर्णाहुति के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। प्रशासन और यज्ञ समिति के लिए सबसे बड़ी चुनौती भीड़ का प्रबंधन थी, जिसे स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों ने बखूबी निभाया। खरीगावा के साथ-साथ पड़ोसी गांवों और दूर-दराज के इलाकों से आए श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।

 रिकॉर्ड उपस्थिति: शाम 5 बजे तक लगभग 1.30 लाख लोगों ने भोजन रूपी प्रसाद पाया।

 अखंड सेवा: भंडारे में शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया, जहाँ हजारों सेवादार निरंतर कार्यरत रहे।

इंद्र देव का आशीर्वाद: वर्षा की बूंदों ने बढ़ाई दिव्यता

यज्ञ की पूर्णता के समय प्रकृति ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जैसे ही अनुष्ठान संपन्न हुआ, आसमान से हल्की वर्षा की बूंदें गिरने लगीं। श्रद्धालुओं ने इसे ईश्वर का साक्षात आशीर्वाद माना। भीषण गर्मी और धूल के बीच इन बूंदों ने वातावरण को शीतल कर दिया, जिससे भक्तों के उत्साह में और भी वृद्धि देखी गई। लोगों का कहना था कि भगवान लक्ष्मी नारायण ने स्वयं वर्षा के रूप में अपनी कृपा बरसाई है।

सामाजिक समरसता की मिसाल

खरीगावा में आयोजित यह यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक समरसता की भी मिसाल पेश की। हर जाति और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते नजर आए। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पिछले नौ दिनों से यहाँ का माहौल किसी उत्सव से कम नहीं था। रात्रि में प्रवचन और रासलीला ने लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान से जोड़े रखा।

सुरक्षा और व्यवस्था

भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। स्वयंसेवकों ने यातायात और पार्किंग की व्यवस्था संभाली ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। यज्ञ समिति के अध्यक्ष और सदस्यों ने इस सफल आयोजन के लिए सभी ग्रामवासियों और प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में कमिटी के सदस्यों मुन्ना उपाध्याय, सत्येंद्र बिंद, उद्धव जी,धीरज द्विवेदी,भोली श्रीवास्तव के साथ साथ गाव की अहम भूमिका रही

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