आरक्षण की घोषणा होते ही भिवंडी मनपा मेयर पद को लेकर रस्साकसी शुरू
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Jan 23, 2026
- 108 views
बहुमत के अभाव में हॉर्स ट्रेडिंग की अटकलें तेज, सियासी जोड़–तोड़ चरम पर
भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका में महापौर पद को लेकर सियासी सरगर्मी अचानक तेज हो गई है। जैसे ही महापौर पद को सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित घोषित किया गया, वैसे ही सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। 90 सदस्यीय मनपा में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण राजनीतिक जोड़–तोड़ और हॉर्स ट्रेडिंग की चर्चाएं जोरों पर हैं।
वर्तमान समीकरणों पर नजर डालें तो कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, जिसके 30 नगरसेवक चुनकर आए हैं। यदि इसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के 12 नगरसेवकों का साथ जुड़ता है तो यह आंकड़ा 42 तक पहुंच जाता है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े 46 से महज चार कम है। ऐसे में कोणार्क विकास आघाड़ी के प्रमुख और पूर्व महापौर विलास पाटिल के पास मौजूद 4 नगरसेवक निर्णायक साबित हो सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह गठजोड़ बनता है तो कांग्रेस-राकांपा-सपा खेमे का महापौर बनना लगभग तय माना जा रहा है। विलास पाटिल का राजनीतिक अनुभव और नगरसेवकों को साथ जोड़ने की उनकी क्षमता किसी से छिपी नहीं है। अतीत में वे कम संख्या बल के बावजूद बहुमत जुटाकर महापौर बनाने का ‘करिश्मा’ कर चुके हैं। कांग्रेस खेमे में तारिक अंसारी, प्रशांत लाड, विलास पाटिल और प्रतिभा पाटिल जैसे नाम संभावित दावेदारों के तौर पर सामने आ रहे हैं।
दूसरी ओर, भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) की महायुति के पास कुल मिलाकर करीब 32 नगरसेवक हैं, जो बहुमत से काफी पीछे हैं। उन्हें महापौर बनाने के लिए कम से कम 14 अतिरिक्त नगरसेवकों के समर्थन की जरूरत होगी। यदि राकांपा (शरद) के 12 और पूर्व महापौर जावेद दलवी के 3 नगरसेवकों का साथ मिलता है, तो भाजपा भी अपना महापौर बना सकती है। भाजपा की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटिल के भतीजे सुमित पाटिल, साफ-सुथरी छवि वाले नारायण चौधरी और संतोष शेट्टी को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा अंदरखाने जोरदार रणनीति पर काम कर रही है और राजनीतिक चमत्कार करने का उसका पुराना रिकॉर्ड भी चर्चा में है।
इस पूरे समीकरण में सपा विधायक रईस शेख की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सपा के नगरसेवकों और विधायक रईस शेख का रुख जिस ओर होगा, उसी ओर भिवंडी का महापौर तय हो सकता है। इतिहास भी गवाह है कि कोणार्क विकास आघाड़ी इससे पहले कम संख्या में नगरसेवक होने के बावजूद महापौर पद हासिल कर चुकी है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत होने के बावजूद पार्टी के 18 नगरसेवकों की बगावत से कोणार्क ने महापौर पद पर कब्जा किया था। उसी तर्ज पर इस बार भी सियासी उलटफेर से इनकार नहीं किया जा सकता। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजनीतिक ऊंट किस करवट बैठता है और भिवंडी महानगरपालिका की महापौर की कुर्सी आखिर किसके हिस्से आती है।


रिपोर्टर