भिवंडी मनपा में "प्लेसमेंट पॉलिसी" से पक्षाघात !

सक्षम अधिकारी बने "पंगु" — शहर की व्यवस्था ध्वस्त, नागरिक परेशान

भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर शहर महानगर पालिका में कई वर्षों से प्रशासक राजवट लागू है। नागरिकों को उम्मीद थी कि बिना राजनीतिक दबाव के प्रशासन पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से काम करेगा, परंतु हालात बिल्कुल उलट है। पिछले कुछ महीनों में पालिका के अस्थापना विभाग में अधिकारियों की नियुक्तियों और स्थानांतरण के नाम पर जो खेल खेला जा रहा है, उसने न केवल सक्षम अधिकारियों को पंगु बना दिया है बल्कि पूरे शहर की प्रशासनिक मशीनरी को जकड़ कर रख दिया है।

पालिका के भीतर “प्लेसमेंट” के नाम पर हो रही यह अदला-बदली अब एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है। कुछ अधिकारियों को एक साथ दो से लेकर छह विभागों की जिम्मेदारी थमा दी गई है, जबकि कई अनुभवी और सक्षम अधिकारियों को ऐसे विभागों में भेज दिया गया है जहां उनका कोई विशेष कार्य नहीं रह गया। परिणामस्वरूप, शहर की अधिकांश मूलभूत सेवाएं—जैसे सफाई, पानी, स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था— अवैध इमारत तोड़क कार्रवाई ठप हो चुकी हैं।

पालिका के सुरक्षा विभाग में कार्यरत सुनील भोईर, सायरा अंसारी और राजू गोसावी जैसे अधिकारी वर्षों से निष्क्रिय बैठे है। बताया जाता है कि उन्हें “प्लेसमेंट” के नाम पर जानबूझकर विभागीय कामकाज से दूर रखा गया है। इसी तरह जनसंपर्क विभाग और समाज कल्याण विभाग में अपनी दक्षता और अनुभव के लिए जाने जाने वाले सहायक आयुक्त मिलिंद पलसुले को उम्र के अंतिम पड़ाव में खेल व क्रीड़ा विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई है। कई प्रभाग समितियों में प्रभारी सहायक आयुक्त और शहर विकास विभाग के अनुभवी अधिकारी सुदाम जाधव अब वाचनालय विभाग में पदस्थ हैं, जबकि आपातकालीन विभाग के प्रमुख रहे साकिब खर्बे को उनके ही विभाग में अधीनस्थ बनाकर जानबूझकर पंगु बना दिया गया है।

इन अराजक तबादलों के चलते नागरिकों के दैनिक कार्य महीनों तक अधर में लटके रहते है। सड़कों की मरम्मत अधूरी पड़ी है, पेयजल आपूर्ति बाधित है और शहर में फैला कचरा स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। स्वच्छता विभाग की लापरवाही के कारण डेंगू और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। टैक्स वसूली नगण्य है और पालिका का खजाना लगातार खाली हो रहा है। विकास कार्यों के लिए आने वाली निधि का उपयोग मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बजाय कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों में किया जा रहा है। पालिका के भीतर चल रही यह “प्लेसमेंट पॉलिटिक्स” अब एक सुनियोजित तंत्र का रूप ले चुकी है। जानकारों का कहना है कि कुछ अधिकारियों को हाशिये पर रखकर चुनिंदा चेहरों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इसके चलते न केवल प्रशासनिक संतुलन बिगड़ गया है बल्कि नागरिकों का भरोसा भी लगातार कम हो रहा है। भिवंडी की स्थिति यह है कि विकास कार्य फाइलों में बंद हैं और शहर की समस्याएं सड़कों पर खुली पड़ी हैं। उड़ान पुलों की मरम्मत वर्षों से अधर में है, पानी की पाइपलाइनें टूट चुकी हैं और सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। दक्ष नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता ने भिवंडी को कचरे और जाम के शहर में बदल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक महानगर पालिका में पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदारी की भावना नहीं लौटेगी, तब तक भिवंडी का विकास केवल कागजों और बैठकों तक सीमित रहेगा। सक्षम अधिकारियों को उचित जिम्मेदारी और स्वतंत्रता दिए बिना शहर की प्रगति संभव नहीं। शहर के दक्ष नागरिकों ने मांग की है कि  क्या यह “प्लेसमेंट पॉलिसी” विकास के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बन चुकी है, या फिर यह सिर्फ कुछ अधिकारियों की कुर्सियों को बचाने का साधन है ? समय आ गया है कि प्रशासक इस स्थिति की गंभीरता को समझें और प्रशासन को “पंगु” होने से बचाऐ"।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट