लालू के जंगल राज, नीतीश के अफसरशाही राज, से त्रस्त जनता तीसरे विकल्प की तलाश में
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Mar 03, 2025
- 108 views
संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय की लेखनी से
दुर्गावती(कैमूर)-- लालू यादव के जंगल राज से उबकर जनता ने बिहार की कमान नीतीश कुमार को दिया लेकिन नीतीश कुमार भी इस मुद्दे पर खरा नहीं उतरे। आज अफसर शाही चरम पर है जहां जाओ अफसरो की मनमानी रवैया के चलते लोग परेशान नजर आ रहे हैं। लगातार 1 साल तक चले किसान आंदोलन का तमाशा देखती रही सरकार लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजे पर नहीं आ पाई जिसके कारण किसान बहुत नाराज दिख रहे हैं। किसानों से कृषि ऋण वसूली के मामले पर आरबीआई के नियमों का पालन तो कुछ बैंकों के द्वारा किया जाता है लेकिन बिहार का दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक इन नियमों के विरुद्ध लगातार किसानों के साथ दुर्व्यवहार कर रहा है और लगातार आरबीआई के नियमों का अनदेखी कर किसानों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी कर रहा है, लेकिन बिहार सरकार मुक दर्शक बनी हुई है। वंशवाद की धोर विरोधी भारतीय जनता पार्टी आज नीतीश कुमार के पुत्र के राजनीति में प्रवेश पर अपनी चुप्पी साधे हुए हैं जिस पर नजर बिहार के जनता की भी है। मोदी के नाम पर सुर्खियां बटोर कर बिहार में भी सरकार बनती रही और सरकार को पदाधिकारी के तानाशाही रवैया पर मिल रहे भाजपा के समर्थन से भी जानता चिंतित दिखाई दे रही है। नीतीश कुमार के पारियों और पार्टियों के फेर बदल के चलते कभी राजद तो कभी बीजेपी के मजबूरी को जनता देख रही है लेकिन इस समर्थन का दंश तो जानता ही झेल रही है। अपनी सरकार बचाने का जो खेल बिहार में हो रहा है उस से उबकर जनता तीसरे विकल्प की तलाश में लगी हैं। बिहार में तीसरे विकल्प के रूप में जन स्वराज पार्टी दस्तखत दे चुकी है जिसके ऊपर भरोसे पूर्ण रूप नहीं हो पा रहा है क्योंकि प्रशांत किशोर का तिकड़मी खेल पार्टियों को छलपूर्ण जीताने का खेल याद है फिर भी सबके निगाहों पर यह पार्टी है जिसे आशा की निगाहें से जनता देख रही है लेकिन जन स्वराज का साफ स्टैंड नहीं होने से जनता अभी ऊहा पोह में है। अब देखना यह है कि इस बार सत्ता बदलने की तलाश कर रही बिहार की जनता किस तरफ अपना रुख बदलती है जिससे नीतीश कुमार के अफसर शाही राज से मुक्ति मिल सके।


रिपोर्टर