छठ व्रतियों की आस्था से खिलवाड़: अधिकारियों को फोन करने के बाद भी नहीं टूटी नींद, गंदगी के बीच अर्घ्य देने को विवश होंगे लोग?

सहायक संवाददाता अभिषेक तिवारी की रिपोर्ट

दुर्गावती / कैमूर जिला के आस्था के महापर्व छठ पूजा की उल्लास और तैयारियां पूरे बिहार में जोर-शोर से चल रही हैं। इस महापर्व में सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण मुद्दा छठ घाटों यानी तालाबों की स्थिति का होता है। पूरे बिहार वर्ष में इस समय तालाबों की स्थिति देखने लायक बनी हुई है, जहाँ एक तरफ सरकार स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है


ऐसा ही एक गंभीर मामला कैमूर जिले के दुर्गावती प्रखंड के अंतर्गत आने वाले कर्मनाशा बाज़ार के समीप स्थित तालाब से सामने आया है। महापर्व छठ बेहद नजदीक है, लेकिन इस ऐतिहासिक और प्रमुख तालाब की स्थिति अत्यंत दयनीय और नारकीय बनी हुई है। तालाब में चारों तरफ गंदगी का अंबार है, जलकुंभी पसरी हुई है और पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है।

अधिकारियों की बेरुखी, फोन करने पर भी नहीं मिला जबाब 

स्थानीय ग्रामीणों और छठ पूजा समिति के सदस्यों का आरोप है कि इस संबंध में प्रखंड के जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार फोन के माध्यम से सूचित किया गया और स्थिति से अवगत कराया गया। लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। फोन करने के बावजूद अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं और न ही घाट की सफाई के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया है। अधिकारियों की इस बेरुखी और उदासीनता के कारण स्थानीय जनता और छठ व्रतियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

आस्था और सुरक्षा दोनों पर मंडरा रहा खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि इसी तालाब में सैकड़ों छठ व्रती भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए उतरेंगे। ऐसे में इतनी गंदगी के बीच पूजा कैसे संपन्न होगी? दूषित पानी से संक्रामक बीमारियों का खतरा तो है ही, साथ ही घाटों की मरम्मत न होने से हादसों का डर भी बना हुआ है।

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