सीयूएसबी में उभरती पर्यावरणीय चुनौतियों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

ब्यूरो चीफ प्रकाश कुमार की रिपोर्ट 

गयाजी। दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में ‘इमर्जिंग एनवायरनमेंटल चैलेंजेज जैपर्डाइजिंग पब्लिक हेल्थ: पॉलिसी इंटरवेंशन्स फॉर रेजिलिएंट सोसाइटीज ’ (ईईसीएच-पीआईआरएस) 2026 विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ उद्घाटन सत्र के साथ हुआ। सीयूएसबी के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा ‘स्वस्थ पर्यावरण, स्वस्थ जनसमुदाय, सुदृढ़ भविष्य’ विषयवस्तु के अंतर्गत आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और जनस्वास्थ्य पर उनके प्रभावों पर विचार-विमर्श करने के लिए शोधार्थियों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, व्यावसायिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों तथा शोधार्थियों ने भाग लिया है। सम्मेलन में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण एवं जल की कमी, अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय न्याय, खाद्य सुरक्षा, विकिरण एवं पर्यावरण, खनन के प्रभाव तथा पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर परिचर्चा की जाएगी | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विज्ञान भारती (विभा) के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिव कुमार ने अपने संबोधन में सतत पर्यावरणीय परिणामों की प्राप्ति के लिए वैज्ञानिक ज्ञान, पारंपरिक बुद्धिमत्ता और सामुदायिक सहभागिता के समन्वय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने में भारतीय वैदिक ज्ञान की प्रासंगिकता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। डॉ. कुमार ने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान समय की अनेक पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और वैदिक साहित्य में निहित हैं। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय और समाज से केवल चर्चाओं तक सीमित रहने के बजाय व्यावहारिक समाधानों के क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के छोटे-छोटे प्रयास सामूहिक रूप से पर्यावरण की बड़ी समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह ने ‘एक स्वास्थ्य’ दृष्टिकोण के अंतर्गत पशुधन और मधुमक्खियों जैसे जीवों की आबादी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने पारिस्थितिकीय स्थिरता सुनिश्चित करने और मानव स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए स्वदेशी एवं क्षेत्रीय फसल प्रजातियों की उपयोगिता पर भी चर्चा की। डॉ. सिंह ने समकालीन पारिस्थितिकीय एवं जनस्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान में पर्यावरणीय शिक्षा, वैज्ञानिक नवाचार और संस्थागत सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। अध्यक्षीय संबोधन में सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने पर्यावरणीय क्षरण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि, प्रदूषण और जनस्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न विषयों के समन्वय पर आधारित दृष्टिकोण अपनाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने वर्ष 2021 में ग्लासगो में आयोजित कॉप-26 के दौरान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए वैश्विक जनआंदोलन ‘मिशन लाइफ’ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. सिंह ने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय समस्याओं का स्थायी समाधान व्यक्ति और समाज की जीवनशैली में परिवर्तन से ही प्रारंभ हो सकता है। अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त की पंक्ति ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ अर्थात ‘पृथ्वी मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूँ’ का उल्लेख करते हुए कुलपति ने प्रकृति के प्रत्येक घटक के प्रति सम्मान का भाव रखने और पृथ्वी के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंध स्थापित करने पर बल दिया। जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि औपचारिक उद्घाटन के पश्चात सम्मेलन के संरक्षक एवं पृथ्वी, जैविक एवं पर्यावरण विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. रिजवानुल हक ने स्वागत संबोधन में जनस्वास्थ्य की रक्षा और सतत विकास को प्रोत्साहित करने में पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। सम्मेलन की विषयवस्तु और उद्देश्यों का परिचय देते हुए पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं सम्मेलन के संयोजक प्रो. राजेश कुमार रंजन ने सम्मेलन की परिकल्पना और प्रमुख उद्देश्यों को प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र का एक महत्वपूर्ण आकर्षण सम्मेलन की शोध-सार पुस्तक का औपचारिक विमोचन रहा, जिसमें भारत तथा विदेशों के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के शोध योगदान संकलित हैं।

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