डुमरा हत्याकांड चार दिन बाद भी मुख्य आरोपी फरार, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Oct 24, 2026
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दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद परिजनों का गुस्सा बरकरार, सवर्ण संगठनों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
अखिल भारतीय समाचार टीम
बिहार---- रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र के डुमरा गांव में 60 वर्षीय जनार्दन तिवारी उर्फ बच्चा तिवारी की निर्मम हत्या के मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। घटना के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी के फरार रहने से पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पीड़ित परिवार और सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने प्रशासन से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और न्याय सुनिश्चित नहीं किया गया, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
हत्या के बाद सड़क पर उतरे थे ग्रामीण, अब कार्रवाई का इंतजार
20 अक्टूबर को हुई इस घटना के बाद डुमरा गांव में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया था। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने न्याय की मांग को लेकर शव के साथ सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था। करीब 10 घंटे तक चले विरोध के बाद अधिकारियों के आश्वासन पर आवागमन बहाल हुआ। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पुलिस जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा करेगी। हालांकि, दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी मुख्य आरोपी के फरार रहने से लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया, तो मुख्य आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों है? क्या उसकी गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त दबिश दी जा रही है? पुलिस को इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा कायम रह सके।
नशे के विवाद की चर्चा, लेकिन शराबबंदी कानून पर भी सवाल
इस हत्याकांड को लेकर नशे के सेवन अथवा उससे जुड़े विवाद की चर्चा सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। परिजनों और ग्रामीणों के बीच यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि यदि घटना का संबंध नशे से जुड़े विवाद से है, तो उस विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और वारदात तक मामला कैसे पहुंचा?
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि गांव में अवैध शराब की बिक्री हो रही थी, तो स्थानीय स्तर पर इसकी निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले तंत्र ने क्या कार्रवाई की? अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें थीं या नहीं, स्थानीय चौकीदार और संबंधित पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी थी या नहीं तथा किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं—इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
नशे के विवाद का हवाला देकर हत्या के मूल कारणों और संभावित आपराधिक साजिश की जांच अधूरी नहीं छोड़ी जा सकती।
मृतक के नशा सेवन से संबंधित कोई दावा अपने आप में हत्या की परिस्थितियों को स्पष्ट नहीं करता। पुलिस को यह बताना होगा कि हत्या किस वजह से हुई, वारदात में किन लोगों की भूमिका थी और अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियार सहित अन्य साक्ष्यों से क्या जानकारी सामने आई है।
मुख्य आरोपी पर गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय सूत्रों के हवाले से मुख्य आरोपी पर गांव में नशे के कारोबार से जुड़े होने, दबंगई करने और सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण कराने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि आरोपी का नाम पूर्व में अपनी भाभी की संदिग्ध मौत के मामले में भी चर्चा में आया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इनकी जांच कर तथ्यों को सार्वजनिक करना आवश्यक है। ग्रामीणों के बीच यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि गांव में अपना वर्चस्व कायम करने के उद्देश्य से बुजुर्ग जनार्दन तिवारी को निशाना बनाया गया। लेकिन हत्या के पीछे वास्तविक मंशा क्या थी, यह पुलिस जांच और साक्ष्यों से ही स्पष्ट हो सकेगा। प्रशासन को चाहिए कि किसी भी आरोप को बिना जांच के अंतिम निष्कर्ष न माने और न ही किसी महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज करे।
घर के इकलौते कमाऊ सदस्य की मौत, परिवार को आर्थिक सहायता की मांग
परिजनों के अनुसार, जनार्दन तिवारी परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। उनकी हत्या के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई जा रही है। सवर्ण समाज के संगठनों और ग्रामीणों ने हत्याकांड के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, मामले की निष्पक्ष जांच, परिवार को आर्थिक मदद और दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को कठोरतम कानूनी सजा दिलाने की मांग की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस पहल नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि पुलिस और प्रशासन को अपनी कार्रवाई के परिणाम भी सामने रखने होंगे।
अब पुलिस के सामने कई अहम सवाल
इस मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी, हत्या की वास्तविक वजह, सभी संदिग्धों की भूमिका, कथित नशे के कारोबार की जांच और स्थानीय स्तर पर संभावित लापरवाही की पड़ताल महत्वपूर्ण है। पुलिस को अब तक की जांच की स्थिति स्पष्ट करते हुए बताना चाहिए कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और मामले में आगे की कार्रवाई किस दिशा में चल रही है।
डुमरा हत्याकांड अब केवल एक बुजुर्ग की हत्या तक सीमित नहीं रह गया है। यह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने, कानून-व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बनाए रखने और शराबबंदी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े सवाल भी खड़े कर रहा है। जरूरत इस बात की है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य आधारित हो, दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी मुख्य आरोपी कब तक फरार रहेगा और जनार्दन तिवारी के परिवार को न्याय कब मिलेगा?


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