जिले में शांति व सौहार्द पूर्ण बिते दुर्गा पूजा के बीच दुर्गावती पुलिस द्वारा आस्था पर चोट पहुंचाने का आरोप
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Oct 23, 2026
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कर्मनाशा के दुर्गा पूजा पंडाल में नियमों की अनुपालन करने के बावजूद भी साउंड मिक्सर जप्त करने व धरना प्रदर्शन के बाद वापस करने पर सवाल
अखिल भारतीय समाचार टीम
कैमूर---- जिले में शांति व सौहार्द पूर्ण बिते दुर्गा पूजा के उपरांत दुर्गावती थाना प्रशासन पर नियमों की अनुपालन करने के बावजूद भी आस्था पर चोट पहुंचाने का आरोप।
आपको बताते चलें कि दुर्गा पूजा उत्सव के बीच दुर्गावती थाना क्षेत्र के कर्मनाशा बाज़ार स्थित एक दुर्गा पंडाल में उस समय भारी हंगामा और तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब स्थानीय प्रशासन की टीम ने पंडाल के भीतर चल रहे डीजे की मिक्सर मशीन को ज़ब्त कर लिया। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से नाराज पूजा समिति के पदाधिकारियों सहित सैकड़ों की संख्या में मौजूद भक्तों ने पंडाल के बाहर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और ज़ब्त की गई मशीन को तुरंत वापस करने की मांग की। दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष विनय कुमार जायसवाल सहित अन्य का आरोप है, कि नियमों की अनुपालन करते हुए साउंड बॉक्स बजाने के बावजूद बिना सूचना और बिना बुलाए प्रशासन द्वारा साउंड मिक्सर की गई थी जप्त, जिस संबंध में प्रशासनिक रवैये पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। पूजा समिति की अध्यक्ष ने कहा प्रशासन को अगर कोई आपत्ति थी या मिक्सर मशीन ज़ब्त ही करनी थी, तो कम से कम समिति को इसकी सूचना देनी चाहिए थी। बिना अध्यक्ष या किसी अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी को बुलाए, सीधे पंडाल के भीतर घुसकर मशीन उठा लेना सरासर गलत है।अध्यक्ष ने आगे कहा कि अभी शारदीय नवरात्रि की मुख्य पूजा और कई महत्वपूर्ण अनुष्ठान होना बाकी था। ऐसे समय में साउंड सिस्टम का मुख्य हिस्सा (मिक्सर) ज़ब्त कर लेने से धार्मिक माहौल और पूजा के संचालन में भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ।पूजा समिति का दावा है कि वे सरकार और न्यायालय के नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे थे।अध्यक्ष मुताबिक, पंडाल के अंदर जो साउंड बज रहा था, उसकी ध्वनि तीव्रता 60 डेसिबल से नीचे ही रखी गई थी। जो पूरी तरह से निर्धारित ध्वनि प्रदूषण मानकों के दायरे में था। समिति का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से कार्रवाई की।
क्या कहते हैं प्रशासनिक पदाधिकारी
डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है, राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय द्वारा दुर्गा पूजा, पंडालों और मूर्ति विसर्जन के दौरान शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीजे (DJ) के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। अधिकारियों का तर्क है कि नियमों के उल्लंघन की सूचना मिलने पर ही यह त्वरित कार्रवाई की गई। ताकि किसी भी तरह के ध्वनि प्रदूषण या कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके।
अंततः धरना प्रदर्शन पर बैठे श्रद्धालुओं से तनाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन व शांति समिति के सदस्यों के माध्यम से बीच का रास्ता निकालते हुए साउंड मिक्सर वापस किया गया।
सुप्रीम कोर्ट और कानूनी नियम
सुप्रीम कोर्ट और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के अनुसार, त्योहारों और सार्वजनिक स्थलों पर लाउडस्पीकर या साउंड सिस्टम की आवाज के लिए नियम और सीमाएं तय हैं।
औद्योगिक क्षेत्र- दिन में 75 डेसिबल, रात में 70 डेसिबल।
वाणिज्यिक क्षेत्र- दिन में 65 डेसिबल, रात में 55 डेसिबल।
आवास क्षेत्र- दिन में 55 डेसिबल, रात में 45 डेसिबल
साइलेंस जोन- (अस्पताल, स्कूल, कोर्ट के 100 मीटर के दायरे में) दिन में 50 डेसिबल, रात में 40 डेसिबल
समय की पाबंदी- रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर, डीजे या तेज आवाज वाले संगीत यंत्रों के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी है।
विशेष अवसरों पर सरकारें साल में कुल 15 दिनों के लिए किसी विशेष सांस्कृतिक या धार्मिक त्योहार पर रात 10 बजे से मध्यरात्रि (12 बजे तक) तक छूट दे सकती हैं, लेकिन यह साइलेंस जोन में लागू नहीं होता है।
अब सोचने का विषय है कि ध्वनि मानव के अनुरूप था तो साउंड मिक्सर जप्त क्यों? और ध्वनि मानक के प्रतिकूल था तो साउंड मिक्सर वापस क्यों?


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