दुधरा नदी पर पुल नहीं, नाव के सहारे बच्चो की जिंदगी ग्रामीणों की परेशानी पर उठे सवाल
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Sep 09, 2026
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संवाददाता रूपेश कुमार दुबे की रिपोर्ट
कैमूर---- जिले के भभुआं प्रखंड अंतर्गत दुधरा गांव में आज भी विकास की तस्वीर अधूरी नजर आती है। गांव के बीच से गुजरने वाली नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ती है, जो प्रतिदिन नाव के सहारे नदी पार कर विद्यालय जाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि दुधरा गांव से NH-19 की दूरी महज करीब 500 मीटर है, लेकिन नदी पर पुल नहीं होने के कारण किसी आपात स्थिति में ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए करीब 15 किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है।
नाव ही बना आवागमन का सहारा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दिनों में दुधरा नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। ऐसे समय में नाव का परिचालन भी बंद हो जाता है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। नदी पार कर स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राएं विद्यालय जाने से वंचित हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण हो जाने से न केवल बच्चों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा, बल्कि गांव के लोगों का आवागमन भी आसान हो जाएगा।
सांसद मनोज तिवारी का गांव से रहा है जुड़ाव
दुधरा गांव के रहने वाले शिक्षक संकठा तिवारी जोकि शिक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं और उनके अनुसार भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी इसी गांव में रहकर शिक्षा प्राप्त की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि दुधरा नदी पर पुल निर्माण को लेकर कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है।
वहीं ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्रीय विधायक भारत बिंद को भी पुल निर्माण की समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उन्हें अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कांग्रेस सांसद मनोज राम का क्षेत्र दुधरा गांव से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर है। ग्रामीणों का दावा है कि उनके सामने भी पुल निर्माण की समस्या रखी गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।
पुल बनने से कई प्रखंडों को मिलेगा फायदा
ग्रामीण पारसनाथ सिंह का कहना है कि अगर दुधरा नदी पर पुल का निर्माण हो जाता है तो भभुआ और मोहनिया प्रखंड के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा। इसके साथ ही आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी और क्षेत्र के करीब चार प्रखंडों के बीच आवागमन भी सुगम हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में स्थानीय स्तर पर उचित सड़क संपर्क नहीं होने के कारण उन्हें अपनी कृषि उपज को बाजार तक ले जाने में काफी परेशानी होती है। परिवहन की समस्या के कारण कई बार किसानों को अपनी फसल बाजार मूल्य से आधे से भी कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
सरकारी स्तर पर अनुशंसा के बावजूद निर्माण अधूरा
दुधरा निवासी हरिओम सिंह ने बताया कि ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 1669, दिनांक 24 सितंबर 2020 के माध्यम से पुल निर्माण को लेकर अभियंता एवं राज्य गुणवत्ता से संबंधित स्तर पर अनुशंसा किए जाने की बात सामने आई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि जब पुल निर्माण को लेकर वर्षों पहले अनुशंसा की जा चुकी है, तो आखिर अब तक दुधरा नदी पर पुल का निर्माण क्यों नहीं हो सका, यह बड़ा सवाल है।
बरसात में बढ़ जाती है ग्रामीणों की मुश्किल
स्थानीय लोगों के मुताबिक गर्मी और सामान्य मौसम में किसी तरह नाव के सहारे आवागमन हो जाता है, लेकिन बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
खासकर छोटे बच्चों और छात्र-छात्राओं के लिए नदी पार करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी दिन नाव से हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि दुधरा नदी पर जल्द से जल्द स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित रास्ता मिल सके और गांव के लोगों को आवागमन के लिए जान जोखिम में न डालनी पड़े।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से दुधरा गांव का सीधा संपर्क NH-19 से हो जाएगा और जिला मुख्यालय भभुआ की दूरी भी करीब 8 किलोमीटर रह जाएगी।
फिलहाल दुधरा गांव के लोगों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हुई हैं। वर्षों से चली आ रही पुल की मांग आखिर कब पूरी होगी, यह देखने वाली बात होगी।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों में हरिओम सिंह पारसनाथ सिंह, हरिओम सिंह, संकठा तिवारी, प्रदीप तिवारी, प्रेम शंकर तिवारी, विनायक तिवारी, मुकेश तिवारी, सूर्यनाथ, देवमुनि पासवान, बब्बन चौधरी, शुभम सिंह, अरुण तिवारी, लल्लन सिंह, भोला चौधरी, हरिओम बैठा सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे


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