आरक्षण नीति के विरोध में सवर्ण समाज ने निकाला आक्रोश मार्च, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Aug 27, 2026
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काले कानूनों को शीघ्र समाप्त किया जाए, अन्यथा होगा जेल भरो आंदोलन के साथ ही अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन- सवर्ण समाज
ब्यूरो चीफ संदीप कुमार की रिपोर्ट
कैमूर:-- आरक्षण नीति में बदलाव और पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने सहित विभिन्न मांगों को लें सवर्ण समाज ने बुधवार को जिला मुख्यालय शहर भभुआं में निकाला आक्रोश मार्च, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, मांग पूरी न होने की स्थिति में होगा जेल भरो आंदोलन सहित अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन।
आपको बता दें कि राष्ट्र के संविधान के तहत सभी को राष्ट्र में जीवन यापन के लिए सामान्य रूप से रोजगार नौकरी या अन्य पेशा करने का अधिकार है। राष्ट्र के आजादी के समय पूर्व में जो इस्लामीक व अंग्रेजी लुटेरों से लूटे सताये हुए थे, उनके वर्ग के नेतृत्वकर्ताओं द्वारा राष्ट्र के मुख्य धारा में आने हेतु 10 वर्ष के लिए आरक्षण की मांग किया गया था, जिसे संविधान सभा में सम्मिलित हर वर्ग के द्वारा सहर्ष स्वीकार किया गया था। पर राष्ट्र के तथाकथित नेतृत्वकर्ताओं (अपराधी मानसिकता के लोगों) द्वारा सत्ता की मलाई की चाहत में बढ़ोतरी किया गया जो आज भी जारी है। इतना ही नहीं वर्तमान समय देखा जाए तो सवर्ण समाज के लोगों को दोयम दर्जे का नागरिकता प्रदान कर गुलाम बनाने की कोशिश किया जा रहा है। जिसका राष्ट्र के कोने-कोने सहित राष्ट्र की राजधानी नई दिल्ली स्थित जंतर मंतर से भी विरोध जारी है। भारत की अपराधी सरकार द्वारा आंदोलनकारीयों से छल कपट कर प्रताड़ित किया जा रहा है।
जिससे आक्रोशित सवर्ण समाज के द्वारा आक्रोश मार्च जिला मुख्यालय शहर भभुआं नगर पालिका मैदान से एकता चौक होते हुए जिला मुख्यालय पहुंच जिला प्रशासन को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन के माध्यम से सवर्ण समाज ने जाति आधारित आरक्षण की व्यवस्था की समीक्षा कर इसे समाप्त करने की मांग उठाई। समाज के लोगों का कहना है कि गरीबी किसी जाति या धर्म को देखकर नहीं आती, इसलिए सरकारी सुविधाओं और संरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिए। उन्होंने सभी जाति एवं धर्म के लोगों के लिए समान कानून और समान अवसर की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि आरक्षण का लाभ समाज के जरूरतमंद लोगों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है, और इसका लाभ कुछ परिवारों तक सीमित होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में परिवार आधारित सीमा लागू करने, आयकर की सीमा में आने वाले परिवारों को आरक्षण से बाहर रखने तथा केवल मूल नियुक्ति के स्तर पर सीमित संरक्षण देने का सुझाव भी रखा। सवर्ण समाज ने सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण पूरी तरह समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि पदोन्नति में योग्यता,कार्यकुशलता और वरिष्ठता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने संविधान में आवश्यक संशोधन कर आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग का विरोध करना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को वास्तविक संरक्षण और सभी नागरिकों को समान अवसर दिलाना है। मार्च के दौरान समाज के लोगों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की और सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की अपील किया।
मार्च में सम्मिलित नेतृत्वकर्ताओं ने कहा सरकार काले कानून को तत्काल समाप्त कर, सभी धर्म वर्ग के लोगों को सामान्य अवसर प्रदान करें अन्यथा होगा जेल भरो आंदोलन के साथ ही अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन।


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