कुदरा में ₹1.32 करोड़ से बना निशांत सिंह स्टेडियम पहली बारिश में जलमग्न, निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Aug 27, 2026
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संवाददाता रूपेश कुमार दुबे की रिपोर्ट
कैमूर----- जिले के कुदरा नगर पंचायत क्षेत्र में करीब 1 करोड़ 32 लाख रुपये की लागत से तैयार निशांत सिंह स्टेडियम पहली ही बारिश में जलमग्न हो गया। स्टेडियम परिसर में जगह-जगह पानी जमा होने से दौड़ने वाला ट्रैक पूरी तरह पानी में डूब गया है। ऐसे में यहां फिजिकल तैयारी करने वाले युवक-युवतियों और खिलाड़ियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टेडियम के निर्माण और सौंदर्यीकरण पर खर्च की गई बड़ी राशि के बावजूद जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
बारिश के बाद स्टेडियम का नजारा ऐसा है कि मैदान और रनिंग ट्रैक पर पानी जमा होने के कारण पूरा परिसर तालाब जैसा दिखाई दे रहा है। खिलाड़ियों का कहना है कि अगर सामान्य बारिश में ही ऐसी स्थिति पैदा हो रही है, तो आने वाले दिनों में तेज बारिश के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। सबसे बड़ी चिंता उन युवाओं को लेकर है, जो सेना, पुलिस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फिजिकल तैयारी करने के उद्देश्य से स्टेडियम पहुंचते हैं।
स्टेडियम में अभ्यास करने वाले क्रिकेट प्रशिक्षक विनय कुमार, शिवम कुमार और रितेश पांडे ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान ही जल निकासी की समस्या को लेकर संबंधित लोगों को जानकारी दी गई थी। उनका कहना है कि समय रहते अगर जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाती तो आज स्टेडियम की यह स्थिति नहीं होती। प्रशिक्षकों के मुताबिक पहली बारिश ने ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और खिलाड़ियों का आरोप है कि स्टेडियम में सिर्फ जलजमाव की समस्या ही नहीं है, बल्कि कई अन्य मूलभूत सुविधाएं भी सवालों के घेरे में हैं। लोगों के मुताबिक उद्घाटन से पहले ही स्टेडियम परिसर में बनाई गई प्याऊ का नल गायब हो चुका है। वहीं खिलाड़ियों और आम लोगों की सुविधा के लिए दोनों तरफ लगाई गई स्ट्रीट लाइट भी केवल एक बार जलने के बाद बंद पड़ी हुई हैं।
खिलाड़ियों के लिए चेंजिंग रूम बनाए जाने की बात भी कही गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार इसकी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं स्टेडियम परिसर में बने शौचालय में भी अक्सर ताला बंद रहने की बात सामने आ रही है। इससे खिलाड़ियों और स्टेडियम पहुंचने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेडियम के निर्माण और सौंदर्यीकरण से पहले मैदान की स्थिति बेहतर थी और यहां खेल गतिविधियां आसानी से संचालित होती थीं। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अगर बारिश होते ही पूरा परिसर पानी में डूब जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
लोगों का कहना है कि किसी भी खेल मैदान के निर्माण में सबसे जरूरी चीजों में जल निकासी की व्यवस्था होती है। खासकर ऐसे स्टेडियम में जहां युवाओं को नियमित रूप से दौड़ और शारीरिक अभ्यास करना है, वहां पानी का इस तरह जमा होना खिलाड़ियों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। लंबे समय तक जलजमाव रहने से रनिंग ट्रैक और मैदान की गुणवत्ता भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
वहीं स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्टेडियम के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, जल निकासी की व्यवस्था और अन्य सुविधाओं की जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं।
अब सवाल यह है कि ₹1.32 करोड़ की लागत से तैयार किए गए इस स्टेडियम में पहली बारिश में ही जलजमाव की स्थिति क्यों पैदा हुई? यदि जल निकासी की समस्या की जानकारी निर्माण के दौरान ही संबंधित लोगों को दी गई थी, तो उस पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और खिलाड़ियों के लिए जिन सुविधाओं का दावा किया गया था, वे अब तक पूरी तरह उपलब्ध क्यों नहीं हैं?
स्थानीय लोगों और खिलाड़ियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही स्टेडियम का निरीक्षण कराएगा और जल निकासी समेत अन्य समस्याओं का स्थायी समाधान करेगा, ताकि जिस उद्देश्य से लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर स्टेडियम तैयार किया गया है, उसका वास्तविक लाभ कुदरा के खिलाड़ियों और युवाओं को मिल सके।


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