हिरोशिमा दिवस: शांति और निरस्त्रीकरण के संकल्प का दिन


संवाददाता पारसनाथ दुबे की रिपोर्ट 


डेहरी(रोहतास)--- मानव अधिकार कार्यकर्ता संतोष उपाध्याय ने कहा है कि

 हिरोशिमा दिवस पर हम 1945 की उस परमाणु त्रासदी को याद करते हैं जिसने लाखों मासूम जिंदगियाँ लील लीं। हिरोशिमा और नागासाकी ने दुनिया को सिखाया कि युद्ध का अंत केवल विनाश है।

आज जब दुनिया में युद्ध, नफरत और हथियारों की होड़ बढ़ रही है, तब इस दिन का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है: विवादों का हल हिंसा नहीं, संवाद, न्याय और आपसी विश्वास है।

हम सरकारों और नागरिक समाज से परमाणु हथियारों के उन्मूलन और शांति की संस्कृति बनाने की अपील करते हैं। साथ ही देशवासियों से आग्रह है कि परिवार और समाज में प्रेम, सद्भाव और अहिंसा को मजबूत करें।

आइए, हम संकल्प लें कि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण दुनिया दें।



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