डालमियानगर में बच्चों का क्रिकेट का जुनून, किताबों से दूरी
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- May 17, 2026
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संवाददाता पारस नाथ दुबे।
डिहरी आनसोन रोहतास।मोबाइल और टीवी की स्क्रीन से निकलकर अब क्रिकेट का जुनून सीधे मैदान में पहुंच गया है। डालमियानगर के खेल मैदान में सुबह होते ही बच्चों की टोली बैट-बॉल लेकर जुट जाती है। हाल ये है कि पढ़ाई पीछे छूट रही है और हर गली, हर घर में बस चौके-छक्कों की बात हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले घरों में टीवी पर मैच देखने का क्रेज था। अब मोबाइल ने वो जगह ले ली है। बच्चा जागते ही यूट्यूब पर विराट कोहली के शॉट देखता है और स्कूल से लौटते ही मैदान की तरफ दौड़ लगा देता है।
खेल के साथ पढ़ाई का संतुलन बिगड़ा शिक्षकों की मानें तो क्लास में बच्चों का ध्यान कम हो रहा है। होमवर्क अधूरा रहता है और टेस्ट में प्रदर्शन गिर रहा है। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "बच्चा कहता है पढ़कर क्या होगा, धोनी भी तो खेलकर ही बड़े आदमी बने हैं।"
मैदान का नजारा रोज एक जैसा है। कोई छक्का मारकर उछल रहा है तो कोई आउट होकर मुंह लटका लेता है। जीत-हार के इमोशन बच्चों पर साफ दिखते हैं।
अभिभावक भी बेफिक्र
चिंता की बात ये है कि कई अभिभावकों ने बच्चों को पूरी तरह "भाग्य भरोसे" छोड़ दिया है। उनका मानना है कि खेलने से बच्चा बुरी संगत से दूर रहेगा। लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि हर बच्चा प्रोफेशनल क्रिकेटर नहीं बन सकता। पढ़ाई का विकल्प बंद करना भविष्य के लिए खतरा है।
खेल विशेषज्ञ राजीव कुमार कहते हैं, "क्रिकेट गलत नहीं है। ये अनुशासन और टीम वर्क सिखाता है। पर पेरेंट्स को 'पहले होमवर्क, फिर हेलीकॉप्टर शॉट' का नियम बनाना होगा। धोनी और कोहली भी पढ़े-लिखे हैं। सिर्फ टैलेंट से टीम इंडिया नहीं पहुंचा जाता।"
फिलहाल डालमियानगर के मैदान में बैट की खट-खट और बच्चों का शोर बता रहा है कि यहां क्रिकेट ही 'सब्जेक्ट' बन गया है।


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