एसडीएम के परिचारी को निगरानी पूछताछ के बाद छोड़ा


रोहतास।बिहार में दो दशक से अधिक समय से सुशासन की सरकार सत्ता पर काबिज है।विकास की दवा करने वाली सुशासन सरकार के मुखिया नीतीश कुमार के शासन व्यवस्था में कैंसर जैसी बीमारी से भी खतरनाक रूप धारण कर चुका भ्रष्टाचार को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।प्रशासनिक महकमे में कोई कार्य बगैर रिश्वतखोरी के संपादित नहीं हो रहा है।ऐसा कोई कार्यालय नहीं है जहां दलालों की तूती नहीं बोल रही हो और हर जगह दलालों की अनुशंसा ही मायने रखता है।अधिकारी हो या कर्मचारी सबको उपरवार कमाई पर अत्यधिक भरोसा बढ़ता जा रहा है। लेकिन कुछ अधिकारी वो कर्मचारी अपने कर्तव्यों, दायित्वों के प्रति पूरी तरह निष्ठावान एवं ईमानदार भी है।मंगलवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीएसपी नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में पटना से आई टीम ने परिवादी राकेश ठाकुर के शिकायत पर अनुमंडल कार्यालय में अनुमंडल पदाधिकारी के परिचारी के रूप में पदस्थापित विनोद कुमार ठाकुर को 1.60 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में दबोच लिया और अपने साथ स्थानीय थाना में ले जाकर घंटों पूछ ताछ किया।जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम को जांचोपरांत यह स्पष्ट हो गया कि रिश्वत मांगने या लेने की बाते सत्य प्रतीत नहीं है और परिवादी तथा आरोपी दोनों एक ही गांव के निवासी है एवं दोनों के बीच जमीनी विवाद लंबे समय से चल रहा है तो देर शाम अपने चंगुल से मुक्त कर दिया।यानि इस मामले में बड़ी करवाई का दम भरने वाली निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम को एक बड़ा झटका लगा है तथा खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली कहावत चरितार्थ होते नजर आई।इस मामले में जितनी मुंह उतनी बाते अब आम आवाम के बीच होने लगी है तथा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्यशैली पर लोग तरह तरह के सवाल भी खड़ा करने लगे है।सूत्रों पर विश्वास करे तो जिस भूमि विवाद के निराकरण के लेनदेन मामले में रिश्वत मांगने की बाते मीडिया के समक्ष निगरानी डीएसपी ने कहा था।उसका महीनों पूर्व भूमि सुधार उप समाहर्ता के न्यायालय से निष्पादित हो जाने की बाते सामने आ रही है।ऐसे में कोई निष्पादित मामले में रिश्वत की मांग लोगों के गले नहीं उतर रहा है।हालांकि आरोप मुक्त परिचारी बिनोद कुमार ठाकुर को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम द्वारा एक लाख 60 हजार रुपए के साथ अपने चंगुल में लिए जाने की खबर जंगल में आग की तरफ फैल गई और सोशल मीडिया में तेजी से वायरल होने लगा।उधर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम द्वारा जांचोपरांत मुक्त हुए परिचारी ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं।षड्यंत्रकारियों के मनसूबे पर पानी फिर गया और वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया और वे औंधे मुंह गिर पड़े।कहा कि मेरे मान सम्मान को कुचलने का प्रयास किया गया है।मुझे न्यायालय में भरोसा है और न्याय के लिए न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।

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