7 करोड़ की बिल्डिंग सरकारी अस्पताल या सरकारी उपेक्षा भवन? मरीज लाचार


रोहतास। जिले के तिलौथू सरकारी अस्पताल की आलीशान इमारत देखकर लगता है जैसे यहां इलाज नहीं, राजकीय महोत्सव होता होगा। लेकिन हकीकत? मरीज पसीने में लथपथ, तीसरे मंजिल पर हॉल में एक भी एसी नहीं, और डॉक्टरों का व्यवहार ऐसा जैसे मरीज सरकारी मेहमान नहीं, सजा काटने आए कैदी हों।


सरैया के मुखिया संजय चौधरी और तिलौथू पूर्वी की मुखिया श्रीमती पुनीता द्विवेदी जी ने जब अस्पताल का निरीक्षण किया, तो 7 करोड़ की लागत की इमारत के भीतर इंसानियत की जगह बर्फ जैसा ठंडा व्यवहार और गर्म हवा के थपेड़े मिले। ऊपर में एसी तो दूर, मरीजों के लिए पानी तक की व्यवस्था भगवान भरोसे!


स्वास्थ्य मंत्री जी के दावों की हकीकत इतनी ठंडी है कि उसे पंखा भी शर्मिंदा कर दे। मंत्री जी कहते हैं – "सभी व्यवस्था दुरुस्त है"। शायद उनका "दुरुस्त" मतलब दीवारों पर पेंट और मरीजों पर बेरुखी होता है।


कहना ये है कि अगर यही 7 करोड़ से एक आलीशान शादी हॉल बनता, तो शायद वहां एसी, वेटर और सम्मान सब होता। लेकिन अफ़सोस – ये तो सरकारी अस्पताल है... यहां बीमारी का इलाज नहीं, व्यवस्था की बीमारी फैलती है। मेंटेनेंस चार्ज प्रत्येक वर्ष 5 लख रुपए बताया गया। जबकि अस्पताल के दोनों साइड 20 लाख का शौचालय बेकार पड़ा हुआ है।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट