सोन नहर जलविद्युत परियोजना बदहाल: 13 में से 8 इकाइयां बंद, 20 मेगावाट उत्पादन का सपना अधूरा
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Jul 03, 2026
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सिंचाई के साथ बिजली उत्पादन की महत्वाकांक्षी योजना रखरखाव के अभाव में पड़ी सुस्त
रोहतास ।सोन नदी की नहरों के तेज जल प्रवाह से बिजली उत्पादन की महत्वाकांक्षी योजना आज गंभीर उपेक्षा का शिकार है। रोहतास, औरंगाबाद और अरवल जिलों में स्थापित 13 लघु जलविद्युत परियोजनाओं में से आठ इकाइयां वर्षों से बंद पड़ी हैं, जबकि संचालित इकाइयां भी अपनी निर्धारित क्षमता के मुकाबले बेहद कम बिजली उत्पादन कर रही हैं। नतीजतन लगभग 20 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली यह परियोजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। वर्ष 1995 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य सिंचाई के लिए छोड़े जाने वाले सोन नहर के पानी के तेज बहाव से टरबाइन चलाकर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करना था। डेहरी में पहली जलविद्युत इकाई स्थापित होने के बाद रोहतास, औरंगाबाद और अरवल के विभिन्न स्थानों पर कुल 13 परियोजनाएं विकसित की गईं, लेकिन समय के साथ अधिकांश इकाइयां तकनीकी खराबी, रखरखाव की कमी और अधूरे कार्यों के कारण ठप हो गईं।
वर्तमान में रामपुर (नटवार) की परियोजना रद्द हो चुकी है, जबकि पहरमा में दोबारा उत्पादन शुरू कराने की तैयारी चल रही है। नासरीगंज और सबारी में मरम्मत व साफ-सफाई का कार्य जारी है। ढेलाबाग, श्री खिंडा और बारुण में सीमित क्षमता के साथ कुछ इकाइयां संचालित हैं, जबकि डिहरा, सिपहां, बलिदाद, जयनगरा, अरवल और बेलसार में निर्माण एवं ट्रांसमिशन से जुड़े कार्य चल रहे हैं। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, डेहरी जलविद्युत केंद्र की कुल उत्पादन क्षमता 6.6 मेगावाट है। लंबे समय तक सभी यूनिट बंद रहने के बाद हाल में दो यूनिट चालू किए गए थे, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण एक यूनिट फिर बंद हो गई। वर्तमान में डेहरी, बारुण, ढेलाबाग और श्री खिंडा से ही सीमित मात्रा में बिजली उत्पादन हो रहा है।
प्रमुख परियोजनाओं की उत्पादन क्षमता
डेहरी (पश्चिमी कैनाल) – 6.6 मेगावाट
बारुण – 3.3 मेगावाट
ढेलाबाग – 1 मेगावाट
नासरीगंज – 1 मेगावाट
जयनगरा – 1 मेगावाट
बेलसार – 1 मेगावाट
अगनूर – 1 मेगावाट
श्री खिंडा – 750 किलोवाट
अरवल – 500 किलोवाट
इसके अलावा रामपुर, अकोढ़ी, सवारी, पहरमा, नटवार, डिहरा, सिपहां और बलिदाद में भी जलविद्युत उत्पादन क्षमता विकसित करने की योजनाएं बनाई गई थीं। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी बंद पड़ी इकाइयों की मरम्मत कर उन्हें नियमित संचालन में लाया जाए, तो सोन नहर परियोजना से न केवल 20 मेगावाट तक स्वच्छ बिजली उत्पादन संभव होगा, बल्कि क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को भी काफी हद तक पूरा किया जा सकेगा। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वर्षों से उपेक्षित इन परियोजनाओं को कब तक पूरी क्षमता के साथ पुनर्जीवित किया जाता है।


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