भाजपा का सपना टूटा, कांग्रेस बना सकती है मेयर

भिवंडी। भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका में पहली बार महापौर बनाने का भारतीय जनता पार्टी का सपना इस बार टूटता नजर आ रहा है। किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस के पास अब मेयर पद हासिल करने का मजबूत मौका बनता दिख रहा है। राकांपा (शरद पवार गुट) और अन्य दलों के सहयोग से कांग्रेस मेयर पद तक पहुंच सकती है। मौजूदा आंकड़े भी कांग्रेस के पक्ष में जाते दिखाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि भिवंडी मनपा चुनाव में 18 राजनीतिक दलों के 317 प्रत्याशी और 121 निर्दलीय उम्मीदवारों सहित कुल 438 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। मतगणना के बाद कांग्रेस 30 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार यदि कांग्रेस को राकांपा (शरद पवार गुट) के 12 नगरसेवकों का समर्थन मिलता है तो उसकी कुल संख्या 42 तक पहुंच जाती है। ऐसे में यदि कोणार्क विकास आघाड़ी के 4 नगरसेवक भी कांग्रेस के समर्थन में आते हैं, तो 46 नगरसेवकों का जादुई आंकड़ा पार कर कांग्रेस अपना मेयर बनाने में सफल हो सकती है।

दूसरी ओर भाजपा ने 22 सीटें जीती हैं, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को 12 सीटों पर सफलता मिली है। इस गठबंधन की कुल संख्या 34 तक पहुंचती है, जो बहुमत से अभी भी 12 सीट कम है। यदि भाजपा को भिवंडी विकास मंच के 3 नगरसेवकों और राकांपा (शरद पवार गुट) के 12 नगरसेवकों का समर्थन मिलता है, तो उसके लिए भी मेयर बनाना संभव हो सकता है।

इस पूरे समीकरण में कोणार्क विकास आघाड़ी की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। केवल 4 नगरसेवकों के बावजूद इससे पहले भी यह आघाड़ी महापौर पद तक पहुंच चुकी है। ऐसे में एक बार फिर छोटे दलों की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मेयर पद की दौड़ में आखिर किसका राजनीतिक गणित सही बैठता है और किसके गियर काम आते हैं।

रिपोर्टर

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