जमीनी विवाद में स्टे ऑर्डर और और 144 की प्रक्रिया को सुलभ बनाने की है जरूरत, 1 साल के अंदर जमीनी विवाद के मामले को निपटाये जाने के लिए बने कानून
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Jan 06, 2026
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सामूहिक हिंसा और मारपीट की गति विधियों में आएगी कमी
वरिष्ठ संवाददाता श्याम सुंदर पाण्डेय की लेखनी से
दुर्गावती(कैमूर)-- मारपीट के मामले में ज्यादातर विवादित विवाद जमीन को ही लेकर अक्सर दिखाई देते हैं। हर परिवार में धन संपत्ति को लेकर आपसी मन मुटाव द्वेष देखने को मिलता है और देखते-देखते वह खून खराबे तक पहुंच जाता है। अक्सर गांव में घर बनाने के लिए लोग बढ़ चढ़कर के जमीन दखल करना चाहते हैं जिससे विवाद उत्पन्न हो जाता है और फिर मारपीट और खून खराबे का मामला फौजदारी में पहुंच जाता है। आए दिन जगह जगह पर यदि कोई अवैध कब्जा कर रहा है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति के पास तत्काल रोक लगाने के लिए न तो पर्याप्त कानून बना है न ही पुलिस उसे तब तक के लिए रोक सकती है जब तक सक्षम पदाधिकारी उस पर कोई फैसला नहीं दे देते या स्टे नहीं लगते। सरकार के द्वारा 144 और जो स्टे आर्डर का कानून बना है वह जटिल है जिसके कारण न व्यक्ति विवादित जमीन पर रोक लगा सकता है न ही तत्काल उसे स्टे आर्डर मिलता हैं और कब्जाधारी अपने मन सूबे में कामयाब हो जाता है। जिसके कारण दखल करने वाला पक्ष लंबी प्रक्रिया होने के नाते अपना मकान या गली में घर बना लेता है। जब व्यक्ति न्यायालय के शरण में जाता है तो उसे न्याय की जगह बरसों बरसों तारीखों से गुजरना पड़ता है इसलिए न्यायालय को एक साल के अंदर मामले को सुलझाने का कानून बनाना चाहिए। लेकिन लंबी प्रक्रिया होने के नाते तब तक मकान बनाने वाले दखल करने वाले का हौसला बुलंद हो जाता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि इन सब मामलों में तत्काल पुलिस को स्टे ऑर्डर और 144 की प्रक्रिया को लागू करने के लिए अधिकार होना चाहिए ताकि व्यक्ति काम रुक जाने के बाद सक्षम न्यायालय में जाकर मामले पर मूल साक्ष्य और सबूत के आधार पर न्याय पा सके। सरकार के द्वारा विवादों को सुलझाने के लिए नई पारिवारिक बंटवारे का पोर्टल लॉन्च करने की बात कही गई है यदि ईमानदारी पूर्वक काम होता है तो इससे तनाव और हिंसा में कमी आएगी। बढ़ते हिंसा के लिए यह कानून बनाया जाना सक्षम साबित होगा और अपराध में कमी आएगी।


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