कुर्सी की भूख या संविधान खतरे में
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Aug 18, 2025
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संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय की लेखनी से
दुर्गावती(कैमूर)-- बिहार में विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है बड़े पैमाने पर अधिकारियों का तबादला हो रहा है राजनेता अपने-अपने रणनीति के अनुसार जनता के बीच में जाकर जनता को दिगभ्रमित करने में लगे हैं। सरकार के द्वारा की जा रही घोषणा और पदाधिकारीयो के बदलने से क्या जनता के मानसिकता को बदला जा सकता है मानसिकता तो जनता में विश्वास पैदा करने से होती है। क्योंकि जब काम को जनता देखती है तो प्रमाण की जरूरत नहीं होती,पदाधिकारी तो सरकार के अधीन होते हैं और जैसी सरकार होती है वैसे पदाधिकारी कार्य करते हैं। कश्मीर में यही भारतीय सेना थी जिसके ऊपर पत्थर फेके जाते थे और लोग चिढ़ाते थे लेकिन आज क्या है सेना के सामने कोई आंखें उठाकर नहीं देखता। उत्तर प्रदेश और असम में राज्य की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी वही है लेकिन सरकार बदली और सरकार की मानसिकता बदली आज अधिकारियों के तेवर भी बदले हुए दिखाई दे रहे हैं। अधिकारी गंदे नहीं होते हैं गंदी होती है राज्य की सरकार या देश की सरकार। पूर्व की सरकार और राज्य के सरकारों की गंदी राजनीति का ही परिणाम रहा कि आज देश के कई राज्यों में विदेशी घुसपैठिए भर गए हैं। लेकिन घुसपैठियों के प्रति सरकार की रणनीति जब बदल रही है तो कुछ राजनीतिक संगठन उसके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं जो देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। 2003 को आधार मानकर जब चुनाव सुधार की प्रक्रिया चुनाव आयोग के द्वारा किया जा रहा है तो विपक्षी दल तिलमिला हुए हैं क्यों। 2003 के पहले जिसके माता-पिता का नाम चुनाव की सूची में होगा तो उस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में अवश्य रहेगा केवल जन्म प्रमाण पत्र देना है। यदि आप भारत के सचमुच नागरिक है तो प्रमाण पत्र देने में क्या दिक्कत है। आपको इसे संविधान,खतरा में है बताकर जनता को दिगभ्रमित करना कहां तक उचित है। विश्व में बदलते भारत की जीडीपी आर्थिक ग्रोथ सामरिक कार्यक्रम वैज्ञानिक अनुसंधान की तरफ नहीं देखना और घुसपैठियों का समर्थन करके संविधान को खतरा में बता कर सत्ता की भूख मिटाने के लिए जनता को गुमराह करना एक बहुत बड़ा अपराध करना कहना अनुचित नहीं होगा। पहले से जनता अब समझदार हो चुकी है इंटरनेट और वेबसाइट समाचार एजेंसी के द्वारा सब कुछ जान जाती है इसलिए राजनेताओं को गुमराह करने की आदत छोड़कर मूलभूत सत्य के साथ जनता के सामने पेश आना चाहिए क्योंकि छलावा करने का युग अब समाप्त हो रहा है।


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