1965 में बना ऐतिहासिक पीपीसीएल कारखाना आज खंडहर में तब्दील
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Oct 16, 2026
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संवाददाता पारसनाथ दुबे की रिपोर्ट
डेहरी रोहतास। 1965 में बना पीपीसीएल कारखाना, जो कभी क्षेत्र की औद्योगिक पहचान और हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी का सहारा था, आज पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है।
कभी इस कारखाने की चिमनियों से निकलता धुआं विकास का प्रतीक माना जाता था, लेकिन आज टूटी दीवारें, जंग खाई मशीनें और उजड़ा परिसर इसकी बदहाली की कहानी बयां कर रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कारखाना बंद होने के बाद से न तो इसके जीर्णोद्धार की कोई योजना बनी और न ही पुनः चालू करने की दिशा में ठोस पहल हुई।
कारखाने के बंद होने से हजारों परिवार बेरोजगार हो गए और पीपीसीएल औद्योगिक रौनक खत्म हो गई। आज कभी युवा रोजगार के लिए पलायन को मजबूर हैं। कभी बिहार का यह उद्योग धड़कन माना जाता था सरकार के उदासीन रवैया के कारण सारा मशीन कबाड़ में बिक गया उद्योग के बगल में ही गंधक का पहाड़ मौजूद था जिसके चलते उर्वरक पर्याप्त मात्रा में होने के बाद खाद तैयार किया जाता था।
लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित कर उद्योग के रूप में फिर से विकसित किया जाए, ताकि क्षेत्र में रोजगार और विकास लौट सके।


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