सर्वव्यापी अस्मिता का संवाहक एवं भारतीय आन बान शान -तिरंगा
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Aug 11, 2026
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रोहतास।हर घर तिरंगा घर घर तिरंगा को लेकर काशी काव्य संगम रोहतास जिला संयोजक साहित्यकार सुनील कुमार रोहतास ने तिरंगा के बारे में बताते हुए कहते हैं कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र के लिए उसका राष्ट्रीय ध्वज मात्र कपड़े का कोई टुकड़ा या रंगों का एक दृश्य-संयोजन भर नहीं होता। वह उस देश के अतीत के संघर्षों, वर्तमान के पुरुषार्थ और भविष्य की महान आकांक्षाओं का एक जीवंत, गतिमान संकल्प पत्र होता है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' भारतीय गणतंत्र की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक विविधता और अखंडता का मूर्त स्वरूप है।।केसरिया, सफेद और हरे रंग की तीन समानांतर पट्टियों तथा मध्य में सुशोभित 24 तीलियों वाले नीले 'अशोक चक्र' का यह संयोजन केवल देश की भौगोलिक सीमा को ही रेखांकित नहीं करता, बल्कि यह भारत के प्रत्येक नागरिक के सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी समाहित करता है। 'हर घर तिरंगा' जैसे जन-आंदोलनों ने इस ध्वज को सरकारी औपचारिकताओं की सीमाओं से निकालकर प्रत्येक देशवासी के घर, मन और दैनंदिन जीवन से जोड़ दिया है।
तिरंगे में प्रयुक्त प्रत्येक रंग और प्रतीक भारतीय जीवन-दर्शन के मौलिक तत्त्वों को व्यक्त करता है।
तिरंगे के शीर्ष पर स्थित केसरिया (भगवा) रंग भारत की निस्वार्थ सेवा-भावना, साहस, त्याग और शौर्य का बोध कराता है। यह रंग हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता का यह उपहार अनगिनत बलिदानों के बाद मिला है। यह रंग देश के सीमाओं पर तैनात जवानों के अदम्य साहस, समाज सुधारकों के समर्पण और राष्ट्र-निर्माण में लगे प्रत्येक नागरिक की कार्य-ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। मध्य की सफेद पट्टी भारत के मूल स्वभाव को दर्शाती है—शांति, सत्य, अहिंसा और पवित्रता। भारत ने युगों-युगों से संपूर्ण विश्व को "वसुधैव कुटुंबकम" (समस्त पृथ्वी ही परिवार है) का संदेश दिया है। सफेद रंग इसी वैश्विक शांति और आंतरिक आध्यात्मिक शुचिता का संवाहक है। यह विचार, अभिव्यक्ति और आचरण में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता का संदेश देता है।।निचली हरी पट्टी भारत की उपजाऊ भूमि, समृद्ध कृषि-परंपरा, प्राकृतिक संपदा और लहलहाती फसलों का प्रतीक है। यह रंग देश के किसान के परिश्रम, हमारी अन्न सुरक्षा (भोजन), पर्यावरण के संतुलन, जल स्रोतों की पवित्रता और जंगलों की हरियाली का सीधा प्रतिनिधित्व करता है। हरा रंग जीवन, नव-सृजन और आर्थिक समृद्धि की नींव है।
ध्वज के मध्य में अंकित नीला 'अशोक चक्र' सम्राट अशोक के सारनाथ स्थित सिंह स्तंभ से लिया गया है। नीले रंग का यह चक्र महासागर और आकाश की असीम गहराई व विस्तार का बोध कराता है। चक्र की 24 तीलियाँ दिन के 24 घंटों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो यह संदेश देती हैं कि जीवन गति में है और ठहराव ही मृत्यु है। यह चक्र हमारे समाज को शिक्षा, तर्कसंगतता, विज्ञान और प्रगतिशील सोच की ओर निरंतर बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है।
यदि हम तिरंगे की व्यापकता का सूक्ष्म विश्लेषण करें, तो यह एक आम नागरिक की बुनियादी आवश्यकताओं से लेकर राष्ट्र की सर्वोच्च चेतना तक हर पहलू को स्पर्श करता है:
राष्ट्रध्वज केवल अमूर्त भावनाओं का प्रतीक नहीं है; यह एक ऐसा तंत्र निर्मित करने का संकल्प है जहाँ हर नागरिक को सुरक्षित आवास, सम्मानजनक वस्त्र, पौष्टिक भोजन और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ प्राप्त हों। जब राष्ट्र सशक्त होगा, तभी ये बुनियादी आवश्यकताएँ जन-जन तक पहुँचेंगी।
तिरंगा हमें याद दिलाता है कि हमारी भूमि, नदियाँ (जल), स्वच्छ आकाश और समृद्ध हरियाली ही हमारी वास्तविक संपत्ति हैं। इनका संरक्षण करना केवल एक पर्यावरणीय दायित्व नहीं, बल्कि हमारी देशभक्ति का ही एक रूप है।यह ध्वज हमें ज्ञान-विज्ञान के पथ पर आगे बढ़ने की दिशा दिखाता है। शिक्षा और विज्ञान जहाँ हमारे भौतिक जीवन को सुगम और आधुनिक बनाते हैं, वहीं हमारा प्राचीन आध्यात्म हमारे चरित्र और नैतिक मूल्यों को दिशा देता है।एक सुदृढ़ समाज की नींव खेतों में पसीना बहाते किसान और अपने-अपने क्षेत्रों में ईमानदारी से काम करते नागरिकों पर टिकी होती है। जब समाज संगठित और जागरूक होता है, तब एक अखंड और शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण होता है।
स्वतंत्रता के 'अमृत महोत्सव' के दौरान प्रारंभ किया गया 'हर घर तिरंगा' अभियान भारत के आधुनिक इतिहास का सबसे विशाल जन-आंदोलन बनकर उभरा है। स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक आम नागरिकों के लिए राष्ट्रीय ध्वज फहराना नियमों से बंधा हुआ और सीमित था। इस अभियान का मुख्य ध्येय था कि हर नागरिक अपने घर पर तिरंगा फहराकर उसके साथ एक व्यक्तिगत और भावनात्मक संबंध स्थापित कर सके।जब कोई नागरिक अपने हाथ से अपने घर की छत पर ध्वज लगाता है, तो उसके भीतर केवल गर्व ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने नागरिक कर्तव्यों (स्वच्छता, कानून का पालन, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा) का बोध भी जगता है।। यह अभियान जाति, धर्म, भाषा, प्रांत और आर्थिक विषमताओं से ऊपर उठकर संपूर्ण देश को एक ही पहचान और एक ही ध्वज के नीचे लाकर खड़ा करता है। नागरिकों की भागीदारी को सुगम बनाने के लिए 'भारतीय झंडा संहिता' में संशोधन किया गया। अब पॉलिस्टर, सूती, ऊनी या रेशमी कपड़ों से बने ध्वज भी मान्य किए गए और इसे घरों पर रात में भी फहराए रखने की अनुमति दी गई। करोड़ों तिरंगों के निर्माण ने देश के बुनकरों, खादी उद्योगों और विशेष रूप से ग्राम्यांचलों में महिला स्वयं सहायता समूहों को व्यापक स्तर पर रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान की। डाकघरों, स्थानीय निकायों और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए ध्वज को देश के सबसे दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों तक किफ़ायती दरों पर पहुँचाया गया।।। जहाँ एक ओर करोड़ों छतों पर तिरंगा फहराया गया, वहीं दूसरी ओर 'हर घर तिरंगा' पोर्टल पर डिजिटल सेल्फी अपलोड करने और 'वर्चुअल फ्लैग पिन' करने की तकनीक-संचालित पहल ने युवाओं को इस अभियान से गहराई से जोड़ा।
आज जब भारत वैश्विक मंचों पर आर्थिक विकास, अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कूटनीति के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को छू रहा है, तब तिरंगा हमारी विकास यात्रा का मार्गदर्शक बना हुआ है: 'जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान' का समन्वय: तिरंगा सीमा की रक्षा करते जवान, अन्न उपजाते किसान, प्रयोगशालाओं में कार्य करते वैज्ञानिक और ज्ञान का प्रसार करते शिक्षक—इन सभी के सामूहिक योगदान का उत्सव मनाता है।: हरा रंग और चक्र हमें यह सिखाते हैं कि औद्योगिक और तकनीकी विकास ऐसा होना चाहिए जो हमारी प्रकृति, नदियों और वायुमंडल के साथ सामंजस्य बनाकर चले।।तिरंगा केवल तीन रंगों का संगम नहीं, बल्कि भारत के अतीत के संघर्षों, वर्तमान के संकल्पों और भविष्य के स्वर्णिम सपनों की सामूहिक अभिव्यक्ति है। 'हर घर तिरंगा' अभियान ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब राष्ट्रभक्ति केवल आयोजनों तक सीमित न रहकर हर घर और हर दिल का हिस्सा बनती है, तो देश की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी अखंड शक्ति में बदल जाती है। जब गाँव-गाँव और शहर-शहर के हर मकान पर तिरंगा लहराता है, तो वह यह उद्घोष करता है कि भारत अपनी जड़ों (भूमि, किसान, आध्यात्म) पर मजबूती से टिका हुआ है और साथ ही अपने ज्ञान, विज्ञान और शिक्षा के बल पर संपूर्ण आकाश को छूने के लिए पूरी तरह तत्पर है। तिरंगे की यह अनवरत यात्रा ही एक भारत, श्रेष्ठ भारत का वास्तविक आधार है।


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