सरस्वती शिशु मंदिर अगिआंव बाजार में मातृ गोष्ठी का हुआ आयोजन
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Aug 10, 2026
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अनिल कुमार सिह
ब्यूरो चीफ भोजपुर। जिले के अगियांव बाजार सरस्वती शिशु मंदिर में मातृ गोष्ठी का आयोजन हुआ।मातृ गोष्ठी भैया बहनों के विकास की एक मजबूत कड़ी है । इस गोष्ठी के माध्यम से सभी तरह की गतिविधियों एवं क्रियाकलापों का संवाद के द्वारा जानकारी का आदान प्रदान और कुछ सुझाव देना या लेना जिससे लक्ष्य को प्राप्त करना आसान हो और छात्रों का भविष्य उज्ज्वल हो जाए। इतना ही नहीं चहुंमुखी विकास के लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता के प्रति जागरूक करना आज के समय की माँग है । यह पहली प्राथमिकता है। आज के विकट परिस्थितियों में देश की संस्कृति एवं सभ्यता को बचाए रखना आज के चिंतन में शीर्ष पर होना चाहिए , क्योंकि जो वर्तमान में देश की स्थिति देखी जा रही है वह चिंताजनक है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि हमलोग या तो अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं या जानते नहीं है या जानना नहीं चाहते। इसे बचाने का कार्य विद्या भारती संस्था शिक्षा जगत में वर्षों से करती आ रही है । इससे संबद्ध विद्यालय सरस्वती शिशु/ विद्या मंदिर में अध्ययनरत भैया/ बहनों को अपनी संस्कृति का बोध कराया जाता रहा है और आगे भी कराया जाता रहेगा । इतना ही नहीं बच्चों को कार्य के माध्यम से व्यवहारिक ज्ञान दिया जाता है जिससे बच्चे नजदीक से इसे अनुभव कर अपने जीवन में उतार सके । जिसका परिणाम देश के परिपेक्ष्य में सकारात्मक हो । यह अनुभव किया गया है या यों कहे यह सत्य है कि किसी भी देश की प्रगति उसके संस्कृति और सभ्यता के माध्यम से ही होती है। इन सबों के लिए हम अभिभावक को भी गहराई से चिंतन मनन करने की आवश्यकता है। विद्या भारती ने आप सभी के सहयोग के लिए देश की संस्कृति के लिए भैया/बहनों के साथ साथ आप अभिभावकों के लिए भी किताब उपलब्ध कराती है । ये किताबें कुरुक्षेत्र से मंगाई जाती है। इसमें भारतीय संस्कृति का दर्शन है। इतना ही नहीं दिसम्बर माह में इस किताब से प्रश्न पूछे जाते हैं/ परीक्षा ली जाती है और कॉपी का मूल्यांकन कर परिणाम की भी घोषणा की जाती है साथ ही प्रमाण पत्र भी सहभागियों को दिया जाता है। इसलिए हमलोगों को सर्वप्रथम यह किताब लेकर पढ़ने की जरूरत है , पहले खुद लाभान्वित होना और खुद अपने बच्चों को लाभ पहुंचाना । आप सबों से इस कार्य में सहयोग चाहिए कि अपने अपने समाज में इसे बताएं जिससे देश में आई विकृति समाप्त हो । यह देखा जाता है कि अपनी संस्कृति से विमुख होकर पश्चिमी संस्कृति की ओर लोग बढ़ते जा रहे हैं, जिसके कारण समय समय पर अराजकता की स्थिति दिखाई देती है। इन सभी कारणों से देश का गौरव, सम्मान , समृद्धि का ह्रास होता है। इसे आज बचाने की आवश्यकता है । ऐसी अपनी संस्कृति कभी नहीं रही। हमारी संस्कृति को नष्ट करने की पूर्व में काफी कोशिश की गई किन्तु सफलता नहीं मिली। आगे कभी नहीं मिले इसके लिए हमें और सजग रहने की जरूरत है अपनी संस्कृति की जड़ को और गहराई तक ले जाना है। इसलिए आज के इस नन्हे नन्हे पौधों को अच्छी तरह सींचना है उसकी देखभाल करना है और आगे के लिए तैयार करना यह अत्यंत आवश्यक है । यह आपसी सहयोग से ही संभव है । समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसका भान हो , इसके लिए सामूहिकता में प्रयास करने की आवश्यकता है। ये उक्त बातें विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में कही ।
इसके पूर्व प्रधानाचार्य, दीदीजी , भैया की माताजी ने सामूहिकता में तैलीय चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्प चढ़ाकर मातृ गोष्ठी का श्री गणेश किया। इस गोष्ठी की अध्यक्षता कर रही श्रीमती नीलम तिवारी जी ने अपनी पढ़ाई के साथ अपने बच्चों के संस्कार की चर्चा करते हुए माता पिता , गुरुजन के प्रति समर्पण का भाव , बड़ों के प्रति आदर , बच्चों के प्रति स्नेह का भाव हमेशा बनाकर रखना अपनी संस्कृति की पहचान है ।
आचार्य सौरभ कुमार सिंह ने माताओं का परिचय कराए। और दीदीजी सुश्री मोहिनी कुमारी,लक्ष्मी कुमारी एवं प्रियंका कुमारी की भी योगदान सराहनीय रही।
अंत में शांति मंत्र के साथ इस गोष्ठी का समापन किया गया ।


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