सोख्ता घोटाले की जांच करने पहुंची टीम , खेतों में बने सोख्ता पर ग्रामीणों नें उठाये गंभीर सवाल
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Jul 04, 2026
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डीसीएलआर के नेतृत्व में गठित टीम ने डिहरा व कैथी पंचायत में की जांच, ग्रामीण बोले– सरकारी राशि की हुई बंदरबांट, निष्पक्ष जांच व करवाई की मांग
संवाददाता रूपेश कुमार दुबे की रिपोर्ट
कैमूर-- भभुआं प्रखंड में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत कराए गए सोख्ता निर्माण में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद बुधवार को वरिय पदाधिकारीयों निर्देश पर गठित जांच टीम मैदान में उतरी। दोपहर करीब तीन बजे भभुआ डीसीएलआर श्रेया कुमारी के नेतृत्व में अफसरों की टीम ने सबसे पहले डिहरा पंचायत के सेमरिया गांव पहुंचकर वायरल वीडियो में चर्चित सोख्ता निर्माण का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिसने ग्रामीणों के आरोपों को और बल दे दिया।
जांच टीम ने सेमरिया गांव में चार से पांच पूर्ण निर्मित सोख्तों का निरीक्षण किया। सबसे हैरानी की बात यह रही कि मौके पर मौजूद तकनीकी टीम के पास मापी के लिए मेजरमेंट टेप तक उपलब्ध नहीं था। इसके बाद सोख्ते की गहराई पेड़ों के डंढ़ल के सहारे अनुमान के आधार पर जांची गई, जिसे लेकर ग्रामीणों ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश सोख्तों का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हुआ है। कई जगहों पर गहराई कम मिली तो कहीं ढक्कन की मोटाई मानक से कम दिखाई दी। जांच के दौरान कई स्थानों पर ईंटों की जोड़ाई हाथ लगाने पर ही उखड़ती नजर आई, जबकि सीमेंट-मसाले की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए।
सबसे चौंकाने वाला मामला सेमरिया गांव में सामने आया, जहां खेत के बीच लगभग दो फीट ऊंचे स्थान पर सोख्ता बना मिला। ग्रामीणों का कहना है कि वहां न कोई मकान है, न हैंडपंप, न जल निकासी की व्यवस्था। केवल एक फूस का झोपड़ा है, फिर भी सरकारी राशि खर्च कर सोख्ता का निर्माण करा दिया गया। ग्रामीण इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण बता रहे हैं।
इसके बाद जांच टीम कैथी पंचायत के रामपुर गांव पहुंची। यहां सड़क के किनारे एक इस पार एक दूसरी किनारे तरफ एक ही स्थान पर दो सोख्तों का निर्माण पाया गया। एक सोख्ता मकान के पास मिट्टी से ढंका मिला, जबकि दूसरा सड़क के दूसरी ओर खेत में, सड़क से करीब दो से ढाई फीट नीचे बना मिला। हैरानी की बात यह रही कि वहां न कोई मकान है और न ही किसी प्रकार की जल निकासी। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी जगह सरकारी पैसे से सोख्ता निर्माण का क्या औचित्य था।
जांच के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया कि पूरे निर्माण कार्य में व्यापक अनियमितता और सरकारी राशि की बंदरबांट हुई है। उनका कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष हुई और सही रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को सौंपी गई तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई तय है।
इधर डीसीएलआर श्रेया कुमारी ने बताया कि विभिन्न गांवों में जाकर स्थल जांच की गई है और अभी अन्य स्थानों की जांच भी शेष है। पूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी अधिकारी अपनी संयुक्त रिपोर्ट सक्षम पदाधिकारी को सौंपेंगे। फिलहाल जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। वहीं मौजूद मीडिया कर्मियों को अपना मंतव्य देने से बचती दिखीं।
गौरतलब है कि भभुआ प्रखंड के बारे गांव निवासी कमलेश कुमार ने डीएम, डीडीसी एवं डीआरडीए निदेशक को लिखित आवेदन देकर सदर बीडीओ सतीश कुमार के कार्यकाल में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत कराए गए सोख्ता निर्माण में व्यापक अनियमितता की शिकायत की थी। इसी शिकायत के आधार पर डीएम ने डीसीएलआर के नेतृत्व में वरीय अधिकारियों की जांच टीम गठित की है। अब पूरे जिले की निगाहें इस जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।


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