भिवंडी मनपा में पोस्टिंग का खेल गहराया, अनुभवी कर्मचारी उपेक्षा के शिकार

प्रशासनिक राजवट समाप्त होने के बाद भी दंश झेल रहे हैं कई अधिकारी


भिवंडी। भिवंडी- निजामपुर शहर महानगरपालिका में प्रशासनिक अव्यवस्था और कथित पक्षपातपूर्ण पोस्टिंग का मामला अब खुलकर सामने आने लगा है। मनपा के भीतर ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां वर्षों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ कर्मचारियों को या तो महत्वहीन विभागों में बैठा दिया गया है या फिर बिना किसी स्पष्ट पद के जिम्मेदारियां थमा दी गई हैं। इससे न केवल कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पालिका सूत्रों के अनुसार, कई विभागों में कार्य का स्पष्ट बंटवारा नहीं है। कुछ अनुभवी कर्मचारियों को ऐसे विभागों में तैनात किया गया है, जहां काम न के बराबर है, जबकि दूसरी ओर कम अनुभवी कर्मचारियों को एक साथ कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस असंतुलन के कारण प्रशासनिक कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं।

       शिक्षा विभाग की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है। मनपा के अधिकांश स्कूल जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। खेलकूद जैसी गतिविधियां भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। शिक्षा का स्तर गिरने के कारण शहर के नागरिक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने को मजबूर हैं। कई मामलों में बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़कर काम पर लग जाते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण विभाग में अनुभवी और ईमानदार मानी जाने वाली कर्मचारी निहाला मोमिन को जिम्मेदारी तो दी गई है, लेकिन उनके अनुभव और क्षमता का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है।

इसी तरह सुरक्षा विभाग में राजू गोस्वामी को विभाग प्रमुख और वरिष्ठ श्रेणी की महिला कर्मचारी सायरा अंसारी को कार्यालय अधीक्षक बनाया गया है। दोनों कर्मचारियों के पास विभिन्न विभागों में कार्य करने का लंबा अनुभव है, फिर भी विभागीय कार्यों में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा। कर्मचारियों का कहना है कि निर्णय लेने की स्वतंत्रता और संसाधनों की कमी के कारण वे अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पा रहे हैं।

पालिका क्षेत्र में संचालित तीन लाइब्रेरियों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। यहां बहुत कम संख्या में लोग अध्ययन के लिए पहुंचते हैं, फिर भी इस विभाग की जिम्मेदारी अनुभवी कर्मचारी पूर्व सहायक आयुक्त सुदामा जाधव को सौंप दी गई है। वहीं, पूर्व में सहायक आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके माणिक जाधव को जनगणना जैसे सीमित कार्य वाले विभाग में लगाया गया है, जिससे उनके अनुभव का समुचित उपयोग नहीं हो रहा।

सबसे ज्यादा चर्चा मुख्य आपातकालीन विभाग को लेकर हो रही है। इस विभाग में वर्षों से कार्यरत सार्किब खरबें को बिना किसी आधिकारिक पद के ही पूरे विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वे केवल मौखिक आदेशों के आधार पर काम कर रहे हैं। शहर में अतिक्रमण हटाने के लिए पहचान रखने वाले इस कर्मचारी को औपचारिक अधिकार न मिलने से विभागीय कार्यों में भी बाधाएं आ रही हैं।

सूत्रों का यह भी कहना है कि मनपा के कुछ “मलाईदार” विभागों में कम अनुभव वाले कर्मचारियों को एक साथ दो से तीन विभागों का प्रभार दे दिया गया है। इन कर्मचारियों के पास न तो पर्याप्त अनुभव है और न ही प्रशासनिक दक्षता, फिर भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। आरोप यह भी है कि ऐसे कर्मचारियों को वरिष्ठ अधिकारियों की नजदीकी और कथित भ्रष्टाचार के कारण प्राथमिकता दी जा रही है। इस पूरी स्थिति ने मनपा प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अनुभवी कर्मचारियों की अनदेखी और कार्यों का असंतुलित वितरण न केवल प्रशासनिक अक्षमता को बढ़ा रहा है, बल्कि इसका सीधा असर शहर की बुनियादी सेवाओं पर भी पड़ सकता है। यदि समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में भिवंडी के नागरिकों को शिक्षा, सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं में और अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

रिपोर्टर

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