भिवंडी में महापौर की कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार, सत्ता की चाबी किसके पास ?.

‘किंगमेकर’ की भूमिका में विलास पाटील, 20 फरवरी को होगा बड़ा फैसला


भिवंडी। महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव एक साथ संपन्न होने के बाद अधिकांश महानगर व नगर पालिकाओं में महापौर का चयन हो चुका है, लेकिन भिवंडी महानगरपालिका में अब तक सत्ता का गणित उलझा हुआ है। किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण महापौर पद को लेकर सियासी हलचल चरम पर पहुंच गई है। शहर के राजनीतिक गलियारों से लेकर आम नागरिकों तक एक ही सवाल चर्चा में है—आखिर भिवंडी का अगला महापौर कौन होगा ?.

कोकण आयुक्त द्वारा आगामी 20 फरवरी को महापौर और उपमहापौर पद के चुनाव के निर्देश जारी होने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों के नगरसेवक समर्थन जुटाने और संभावित गठबंधन बनाने में सक्रिय नजर आ रहे हैं।

      हाल ही में शिवसेना के वरिष्ठ नगरसेवक मनोज काटेकर की गटनेता पद पर नियुक्ति ने राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम महापौर पद की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि अभी तक किसी दल ने आधिकारिक रूप से उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन काटेकर का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल माना जा रहा है। इसके आलावा पूर्व महापौर विलास पाटील का नाम मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में अहम माना जा रहा है। बहुमत के अभाव में विभिन्न दलों के बीच समर्थन जुटाने की कवायद जारी है और इस स्थिति में पाटील की भूमिका निर्णायक हो सकती है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार कई नगरसेवक उनके रुख पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि महापौर चुनाव में वे ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकते हैं।

राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक शिवसेना (12), कांग्रेस (30), कोणार्क विकास आघाड़ी (5) और भिवंडी विकास आघाड़ी (3) के संभावित समर्थन से संख्या 50 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के 6 नगरसेवकों के भी इस समीकरण में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह गठबंधन आकार लेता है तो सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि राज्य में नगर विकास विभाग उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास होने के कारण विकास के मुद्दे पर दलों के बीच सहमति बन सकती है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा शिवसेना को महापौर पद के लिए समर्थन देने की संभावनाओं को भी राजनीतिक विश्लेषक नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं। भिवंडी के नागरिक लंबे समय से नए महापौर के चयन का इंतजार कर रहे हैं। अब 20 फरवरी को होने वाले चुनाव के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शहर की सत्ता किसके हाथों में जाएगी। फिलहाल राजनीतिक जोड़-तोड़ और रणनीतिक बैठकों का दौर जारी है, जिससे शहर का राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

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