भिवंडी मनपा चुनाव में वंशवाद हावी, रिश्तेदारों के लिए मांगे जा रहे वोट

भिवंडी। भिवंडी महानगरपालिका चुनाव 2025-26 में इस बार युवाओं के नाम पर चुनाव लड़ा जा रहा है, लेकिन चुनावी मैदान में उतारे गए अधिकतर चेहरे राजनीतिक परिवारों से जुड़े हुए हैं। शहर के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने भाई, भतीजे, बेटे-बेटी और महिलाओं को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है और अपने नाम व पहचान के सहारे उनके लिए वोट मांग रहे हैं। इस चुनाव में पूर्व सांसद, विधायक, महापौर, उपमहापौर और पूर्व नगरसेवकों के परिवारजन चुनावी रण में नजर आ रहे हैं। वर्षों से राजनीति में सक्रिय इन नेताओं ने अब अपनी राजनीतिक विरासत अगली पीढ़ी को सौंपते हुए उन्हें प्रत्याशी बनाया है। हालांकि इनमें से कई उम्मीदवारों की शहर में स्वतंत्र पहचान नहीं होने के कारण प्रचार के दौरान नेताओं की तस्वीरें और नाम प्रमुखता से लगाए जा रहे हैं। चुनावी प्रचार में यह साफ देखा जा रहा है कि प्रत्याशी से अधिक उनके वरिष्ठ परिजन मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं और अपने प्रभाव के आधार पर वोट मांग रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उम्मीदवारों की बजाय नेता के नाम पर मतदान करने की अपील की जा रही है।

गौरतलब है कि विभिन्न राजनीतिक दलों में कई आम नागरिक वर्षों से पार्टी कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हैं। रैलियों, प्रचार और भीड़ जुटाने में इन कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रहती है, लेकिन आर्थिक रूप से सक्षम न होने के कारण उन्हें टिकट देने से अक्सर परहेज किया जाता है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी चुनाव के समय केवल भीड़ जुटाने के लिए उनका उपयोग करती है, जबकि टिकट वितरण में वंशवाद और धनाढ्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है। इस स्थिति के कारण कई कार्यकर्ता नाराज भी नजर आ रहे हैं, लेकिन राजनीति में बने रहने की मजबूरी और भविष्य की उम्मीद के चलते वे पार्टी नहीं छोड़ते। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रवृत्ति नई नहीं है, लेकिन इस बार मनपा चुनाव में यह खुलकर सामने आ रही है।भिवंडी मनपा चुनाव में युवाओं के नाम पर वंशवादी राजनीति को लेकर अब शहर में चर्चा तेज हो गई है। मतदाता भी यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या नगरसेवा के लिए नई सोच और जमीनी अनुभव जरूरी है या फिर केवल राजनीतिक पहचान ही उम्मीदवार बनने की योग्यता बनती जा रही है।

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