त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला सम्पन्न।


अनिल कुमार सिंह 


 ब्यूरो चीफ भोजपुर ।सरस्वती शिशु विद्या मंदिर अगिआंव बाजार में सत्र 2026-2027 हेतु आचार्य कार्यशाला का समापन किया गया। जिसमे विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अनिल कुमार सिंह ने कहा कि यह विद्यालय समाज पोषित विद्यालय हैं। हमलोगों को समाज से अधिक- से -अधिक जुड़कर रहना और समाज को जोड़ना ,संस्कार , ज्ञान यह विद्या भारती की पहली प्राथमिकता है। इतना ही नहीं भैया, बहनों के पंचकोशीय विकास सर्वांगीण विकास,आयाम इत्यादि पर वृहत चिंतन करना यही कार्यशाला का ध्येय हैं। आगे उन्होंने विद्यालय के कार्य की सराहना की और कहा कि इस छोटे विद्यालय में बड़े-बड़े कार्य होते है जो समय -समय पर दिखाई देते है। विद्या भारती के प्रत्येक विद्यालय में सत्रारंभ के पूर्व त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है जो अतिआवश्यक है , क्योंकि लगातार एक ही कार्य करते- करते शिथिलता आ जाती है इसे सक्रियता में बदलने के लिए यह कार्य आवश्यक हैं। इससे सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह अपग्रेड होने में सहायक होता हैं। यह नए- नए विचार को जन्म देता है और चिंतन के रूप में बाहर निकलता है जिससे वर्ष भर की योजना बनाने में मदद मिलती हैं। यह आज के तकनीक और वातावरण के लिए प्रेरित करता हैं। कार्यशाला हमे बहुत कुछ सिखने का , अपने विचार को प्रभावी ढंग से रखने का अवसर देता हैं। यह सामूहिकता में विकासयुक्त योजना बनाने का एक प्लेटफार्म है यह अपनी प्रगति के साथ- साथ भैया, बहनों के सर्वांगीण विकास को सशक्त बनाने में यह अहम् भूमिका निभाता हैं। यह विद्यालय की साल भर की गतिविधि को रेखांकित करता हैं। हम सभी इस कार्यशाला के माध्यम से प्रगतिशील योजना बनाकर इसे लागू करते है जिससे भैया, बहनों का विकास सुनिश्चित किया जाता हैं। परीक्षा , प्रतियोगिता, परिणाम एवं पाठ्ययोजना पर विस्तृत चिंतन मंथन हुई। त्रिदिवसीय कार्यशाला का वृत आचार्या श्रीमती उषा देवी ने रखी। कार्यशाला में बहुत सारे विद्वानों ने भाग लिए एवं विद्यालय के आचार्य श्री सौरभ कुमार सिंह एवं आचार्या श्रीमती नीलम तिवारी, सुश्री मोहिनी कुमारी, सुश्री गीतांजली कुमारी, सुश्री कल्याणी कुमारी, सुश्री नंदनी कुमारी, सुश्री प्रतिक्षा कुमारी ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। प्रधानाचार्य श्री अनिल कुमार सिंह ने धन्यवाद देते हुए कहा कि इस पूरे सत्र में यह विद्यालयी कार्ययोजना पर कार्य सम्पन्न होगा। अंत में शांति मंत्र के बाद कार्यशाला का समापन हुआ।

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