भिवंडी में तीन साल बाद खत्म होगी प्रशासकीय शासन
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Dec 23, 2025
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2026 के पालिका चुनाव के बाद मिलेगा नया महापौर
भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका में पिछले तीन वर्षों से जारी प्रशासकीय शासन का दौर अब समाप्ति की ओर है। वर्ष 2026 में होने वाले महापालिका के सार्वत्रिक चुनावों के बाद शहर को नया महापौर मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही लगभग तीन वर्षों से खाली पड़ी महापौर की कुर्सी पर फिर से जनप्रतिनिधि का अधिकार स्थापित होगा।
महापालिका चुनावों का बिगुल बज चुका है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बनी राजनीतिक दोस्तियां अब दरकिनार होती दिख रही हैं और नगरसेवक पद के इच्छुक उम्मीदवार ‘मैत्रीपूर्ण मुकाबले’ के नाम पर मैदान में उतरने लगे हैं। नामांकन प्रक्रिया के साथ ही मनपा चुनावी रणभूमि में सियासी हलचल तेज हो गई है। शहर के जागरूक नागरिकों का मानना है कि निर्वाचित महापौर की वापसी से भिवंडी महापालिका प्रशासकीय नियंत्रण से मुक्त होगी और शहर के सर्वांगीण विकास को नई दिशा मिलेगी। गौरतलब हो कि 16 दिसंबर 2001 को भिवंडी निजामपुर नगरपालिका को महानगरपालिका का दर्जा मिला था। इसके बाद मई 2002 में पहली बार महापालिका चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस के सुरेश टावरे भिवंडी के पहले महापौर बने। उन्होंने 13 जून 2002 से 17 फरवरी 2005 तक पद संभाला। इसके बाद कोणार्क विकास आघाड़ी के विलास आर.पाटील (2005–2007), भिवंडी विकास मंच के जावेद गुलाम मोहम्मद दलवी (2007–2009), कोणार्क आघाड़ी की यशश्री राजन कडू (2009–2012) और फिर प्रतिभा विलास पाटील (2012–2014) ने महापौर पद की जिम्मेदारी निभाई।
11 दिसंबर 2014 से 8 जून 2017 तक शिवसेना के तुषार यशवंत चौधरी महापौर रहे। इसके बाद कांग्रेस के जावेद दलवी ने दोबारा 2017 से 2019 तक पद संभाला। फिर विलास आर.पाटील के नेतृत्व में प्रतिभा विलास आर. पाटील महापौर बनीं, लेकिन 8 जून 2022 को उनका कार्यकाल समाप्त होते ही महापालिका में प्रशासकीय शासन लागू हो गया। तब से लेकर अब तक महापालिका का कार्यभार आयुक्त प्रशासक के रूप में संभाल रहे हैं और महापौर पद रिक्त है।
करीब आठ साल बाद हो रहे इस महापालिका चुनाव में महापौर पद के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। वार्ड स्तर पर प्रतिष्ठा की लड़ाई, आघाड़ियों में टूट-फूट और युतियों में खींचतान के संकेत मिलने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार स्थानीय समीकरण बड़े दलों की रणनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।
कांग्रेस में टूट से बदली थी सत्ता :
भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका में महापौर और उपमहापौर पद के चुनाव के दौरान कांग्रेस के 18 नगरसेवकों के टूट जाने से भाजपा-कोणार्क विकास आघाड़ी की प्रतिभा पाटील महापौर चुनी गई थीं। वहीं उपमहापौर पद पर कोणार्क समर्थित कांग्रेस नगरसेवक इमरान खान निर्वाचित हुए थे। इससे कांग्रेस-शिवसेना गठबंधन को बड़ा झटका लगा था।
2017 चुनाव का गणित:
2017 के महापालिका चुनाव में 90 सीटों में से कांग्रेस को 47 सीटें मिली थीं और उसने शिवसेना के साथ मिलकर सत्ता बनाई थी। भाजपा को 20, शिवसेना को 12, कोणार्क आघाड़ी व रिपब्लिकन पार्टी को 4-4, समाजवादी पार्टी को 2 और एक सीट निर्दलीय को मिली थी। हालांकि बाद में भाजपा-कोणार्क आघाड़ी ने कांग्रेस के 18 नगरसेवकों को तोड़कर सत्ता पर कब्जा कर लिया था।
भिवंडी महापालिका निकाल 2017
कुल जागा -90
• काँग्रेस- 47 विजयी
• भाजप- 19 विजयी
• शिवसेना-12 विजयी
• कोणार्क विकास आघाडी -04 विजयी
• समाजवादी -02 विजयी
• आरपीआय (एकतावादी)
-04 विजयी
• राष्ट्रवादी-00
• अपक्ष - 02
वर्तमान (2025) में पूर्व नगरसेवकों की स्थित :::
* काँग्रेस- 25
*भाजप- 21
* शिवसेना शिंदे- 12
*कोणार्क विकास आघाडी - 4
*समाजवादी- 3
*आरपीआय (एकतावादी)-4
*राष्ट्रवादी शरद पवार गट - 20
*भिवंडी विकास आघाडी मंच - 1
वर्ष 2022 से प्रशासक राजवट लागू है।


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