भिवंडी में अवैध मोती कारखानों की भरमार, कार्रवाई को लेकर प्रशासन उदासीन

200 से अधिक कारखाने चोरी-छिपे संचालित

टैक्स चोरी के साथ जानलेवा प्रदूषण फैलाने का आरोप.ल


भिवंडी। भिवंडी शहर और आसपास के इलाकों में बिना किसी वैध अनुमति के सैकड़ों की संख्या में अवैध मोती कारखाने धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। इन कारखानों में इस्तेमाल होने वाले अत्यंत खतरनाक रसायनों के कारण आए दिन आगजनी की घटनाएं हो रही हैं और इसका सीधा असर मजदूरों के साथ-साथ आसपास रहने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं, इन कारखानों के जरिए जीएसटी और इनकम टैक्स की खुलेआम चोरी कर सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। शहर के नवी बस्ती, शास्त्रीनगर, गैबीनगर, भारत कंपाउंड, खान कंपाउंड, नारायण कंपाउंड, सुभाषनगर, रावजीनगर, खदान रोड, फुलेनगर, पद्मानगर, शांतिनगर, बिलालनगर, आजादनगर, नागांव, नालापार, अजंता कंपाउंड, नारपोली समेत कई इलाकों में 200 से अधिक प्लास्टिक दानों से मोती बनाने वाले कारखाने चल रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में भी यह अवैध व्यवसाय तेजी से फैल चुका है। इन कारखानों में प्लास्टिक दाना और पाउडर से मशीनों के जरिए मोती तैयार किए जाते हैं, जिसके बाद उन्हें लोहे की डाई में खतरनाक रंगीन केमिकल से रंगा जाता है। मोती रंगाई में इस्तेमाल होने वाला यह रसायन स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक बताया जा रहा है। इसके बावजूद कारखाना मालिक बिना किसी सुरक्षा मानक के खुलेआम इन केमिकलों का उपयोग कर मोटी कमाई कर रहे हैं। इन कारखानों में काम करने वाले गरीब मजदूर रोज़ाना जहरीले धुएं और तापमान के बीच काम करने को मजबूर हैं। सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था न होने के कारण हादसों की आशंका बनी रहती है और कई बार जान भी चली जाती है। रंगाई के बाद निकलने वाला बदबूदार रासायनिक कचरा और भाप नालियों के जरिए बाहर छोड़ दी जाती है, जिससे आसपास का वातावरण जहरीला हो गया है। इसका सीधा असर क्षेत्र के बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बावजूद प्रशासन केवल आश्वासन देकर मामले को टालता आ रहा है। इन कारखानों द्वारा न तो जीएसटी चुकाया जा रहा है और न ही इनकम टैक्स, इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। कारखानों में इलेक्ट्रिक सेफ्टी के नियमों की भी खुलेआम अनदेखी की जा रही है, लेकिन ऊर्जा विभाग भी इस ओर कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है।

इन मोती कारखाना संचालकों द्वारा भिवंडी प्लास्टिक मोती एंटरप्राइजर्स वेलफेयर एसोसिएशन का गठन किया गया है। सामाजिक संगठन फोरम फॉर जस्टिस भिवंडी डिवीजन के सचिव कैलास कर्णकर ने बताया कि इस संस्था का पंजीकरण रद्द करने के लिए चैरिटी कमिश्नर, ठाणे को लिखित आवेदन दिया गया है। साथ ही भिवंडी मनपा और कल्याण स्थित महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी इन कारखानों को बंद कराने की मांग की गई है। भिवंडी क्षेत्र के उप-क्षेत्रीय अधिकारी एस. एस. पाटिल के अनुसार, मनपा क्षेत्र में चलने वाले सभी उद्योगों को नागरिक चार्टर के अनुसार लाइसेंस लेना अनिवार्य है और इसके लिए महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति जरूरी होती है, लेकिन भिवंडी में चल रही मोती फैक्ट्रियों ने अब तक प्रदूषण बोर्ड को कोई आवेदन नहीं किया है। भिवंडी मनपा के प्रभारी पर्यावरण विभाग प्रमुख नितेश चौधरी ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में चल रही प्लास्टिक मोती निर्माण फैक्ट्रियों को मनपा की ओर से कोई लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। इनसे हो रहे प्रदूषण को लेकर मिली शिकायतों की जानकारी कल्याण स्थित महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेज दी गई है। दक्ष नागरिकों की‌ माने तो बढ़ते प्रदूषण, आगजनी की घटनाओं और स्वास्थ्य पर पड़ रहे बुरे प्रभाव के बीच अब भिवंडी में अवैध मोती कारखानों का मुद्दा गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।

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