भिवंडी में अवैध इमारतों का ‘मौत का कारोबार’ जारी

प्रशासनिक सरंक्षण में खड़ी हो रहीं 7 मंजिला ‘मौत की इमारतें’


भिवंडी। भिवंडी–निजामपुर शहर महानगरपालिका क्षेत्र में अवैध निर्माण अब एक संगठित ‘माफिया नेटवर्क’ का रूप ले चुका है। प्रशासक काल में भी पूरे शहर में पांच से सात मंजिला तक की मौत को न्योता देती अवैध इमारतें खुलेआम खड़ी की जा रही हैं। चौंकाने वाला आरोप है कि प्रति स्लैब 100 रुपये फुट के हिसाब से रिश्वत लेकर प्रभाग समितियों के अधिकारी इन जानलेवा निर्माणों को खुला संरक्षण दे रहे है। शहर विकास विभाग में नियमित सक्षम अधिकारी की नियुक्ति न होने की आड़ में सहायक आयुक्तों के भरोसे पूरा तंत्र चल रहा है। इसका सीधा फायदा झोलाछाप बिल्डरों को मिल रहा है, जो मात्र दो से तीन महीनों में सात-सात मंजिला इमारतें खड़ी कर सस्ते दामों में फ्लैट और दुकानें बेचकर फरार हो रहे है। सस्ते घर के सपने में आम नागरिक अपनी जिंदगी भर की कमाई दांव पर लगा रहे है जबकि यह इमारतें किसी भी दिन मौत का कारण बन सकती हैं।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि स्वयं भिवंडी मनपा के प्रशासक एवं आयुक्त अनमोल सागर (भा.प्र.से.) ने वर्ष 2022 से 2025 की शुरुआत तक 291 अवैध इमारतों के निर्माण की पुष्टि प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिए की थी। उपायुक्त विक्रम दराडे ने इनमें से केवल 40 इमारतें तोड़े जाने का दावा किया, लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी शहर में अवैध सात मंजिला इमारतें सीना तानकर खड़ी हैं और प्रशासन के दावों का खुला मज़ाक उड़ा रही हैं।

पालिका सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में मनपा की पांचों प्रभाग समितियों में 150 से अधिक अवैध इमारतें निर्माणाधीन है। हैरानी की बात यह है कि लिखित शिकायतों के बावजूद केवल एमआरटीपी एक्ट की धारा 260 के तहत नोटिस देकर खानापूर्ति की जा रही है। इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इसका मतलब साफ है या तो सिस्टम पूरी तरह फेल है, या फिर अवैध निर्माण को जानबूझकर खुली छूट दी जा रही है।

प्रभाग समिति क्रमांक दो के अंतर्गत टेमघर, भादवड नाका स्थित मकान नंबर 20 की चार मंजिला इमारत को मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश पर मनपा ने जेसीबी से तोड़ दिया था। इस कार्रवाई में 50 से 60 परिवार सड़क पर आ गए। दूसरी तरफ, प्रभाग समिति क्रमांक तीन के अंतर्गत पद्मानगर, कणेरी में घर नंबर 75 तोड़कर उसी स्थान पर पांच मंजिला नई अवैध इमारत धड़ल्ले से खड़ी की जा रही है। जिसकी लिखित शिकायतों के बावजूद प्रशासन मौन बना हुआ है। स्थानीय निवासी एवं कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी चर्चिन सुतार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “छोटे लोगों पर बुलडोजर चलता है और बड़े बिल्डरों को सरकारी सरंक्षण मिलता है। यह दोहरी नीति भिवंडी को किसी बड़े हादसे की ओर धकेल रही है।” जिस तरह से अवैध इमारतें बिना किसी सुरक्षा मानक के खड़ी की जा रही हैं, उससे यह आशंका गहराती जा रही है कि भिवंडी किसी भी दिन बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। सवाल यह है कि तब ज़िम्मेदार कौन होगा — बिल्डर, अधिकारी या पूरा तंत्र? अब शहरवासियों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस ‘मौत के धंधे’ पर कब तक आंख मूंदे बैठा रहेगा।

रिपोर्टर

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