लक्ष्मी नारायण मंदिर में प्रवचन दूसरे दिन जारी
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Mar 25, 2026
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संवाददाता पारसनाथ दुबे
डिहरी रोहतास।श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में चल रहे हनुमान जयंती समारोह के दूसरे दिन मंगलवार को प्रवचनकर्ता नीलांबर मेंराही जी महाराज ने कबीर और सर्वजीत (सर्वानंद ) प्रसंग पर प्रवचन देते हुए बताया कि यह प्रसंग एक अहंकारी विद्वान के " लोकवेद "( भ्रांत ज्ञान) को कबीर साहब द्वारा उनके वास्तविक के तत्वज्ञान से तोड़ने की कहानी है। शास्त्रार्थ में सर्वजीत ने अपने ज्ञान को लबालब भरे लोटे जैसा बताया, जिस पर कबीर ने सुई डालकर समझाया कि कैसे तत्वज्ञान भ्रांत ज्ञान को विस्थापित कर देता है। प्रसंग का मुख्य बिंदु सर्वजीत की अहंकार को तोड़ने से है। जिसमें सर्वानंद एक प्रकांड विद्वान थे जिन्हें अपनी विधा पर बहुत गर्व था,और उन्होंने अपने ज्ञान की धाक जमाने के लिए सर्वजीत नाम रखा था।
वही इन्होंने अपने प्रवचन के दौरान अमृत की महता, भगवान शिव के समुद्र मंथन के दौरान बिश पीने की प्रसंग, शरीर के भीतर मेरुदंड की उपयोगिता की जानकारी सहित भक्त प्रहलाद के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान विष्णु के प्रति अटूट आस्था रखने वाले प्रहलाद और उनके अहंकारी पिता हिरणयकश्यप से जुड़ा हुआ प्रसंग है,जिसमें भक्त प्रलहाद के पिता खुद को भगवान मानते थे और विष्णु की पूजा का विरोध करते थे, जिसके कारण उन्होंने भक्त प्रहलाद को कई बार मारने का प्रयास किए। अंततः भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर खंबे से निकलकर हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त की रक्षा की। इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है की सच्ची भक्ति और ईश्वर में विश्वास सबसेमातादी शक्तिशाली है। वही इन्होंने ने जटायु रावण युद्ध प्रसंग पर प्रवचन देते हुए बताया कि रावण जब माता सीता का हरण कर आकाश मार्ग से ले जा रहा था तभी जटायु की नजर पड़ी और उसने माता सीता को छुड़ाने के लिए रावण से घनघोर युद्ध किया मानों दो पहाड़ आपस में टकरा रहे हैं। बताया कि राम अपने पत्नी सीता के कहने पर कपट- मूग मारीच को मारने के लिए गये और लक्ष्मण भी सीता के कटु-वाक्य से प्रभावित होकर राम को खोजने केऔरतों लिए निकल पड़े।दोनों भाइयों के चले जाने के बाद आश्रम को सूना देखकर लंका के राक्षस रावण ने सीता का हरण कर लिया और बलपूर्वक उसे रथ पर बैठाकर आकाश मार्ग से लंका की ओर चल दिया। सीता जी ने रावण की पकड़ से छूटने के लिए पूरा प्रयत्न किया। किंतु असफल रहने पर करुण विलाप करने लगी।उनके विलाप को सुनकर जटायु ने रावण को ललकारा। गिद्धराज जटायु का रावण से भयंकर संग्राम हुआ, लेकिन अंत में रावण ने तलवार से उनके पंख काट डालें। जटायु मरणासन होकर भूमि पर गिर पड़े। रावण सीता जी को लेकर लंका की ओर चला गया। जटायु के गंभीर रूप से घायल होने के बाद राम का आगमन होता है और राम लक्ष्मण इनका अंतिम संस्कार करते हैं और कहते हैं। "हे पूज्य गिद्धराज जिस लोक में यज्ञ एवं अग्निहोत्र करने वाले समरांगण में लड़कर प्राण देने वाले और धर्मात्मा व्यक्ति जाते हैं, इस लोक से आप प्रस्थान करें। आपकी कीर्ति इस संसार में सदैव बनी रहेगी।
मौके पर के अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार सिंह, केशवर सिंह, संजय सिंह बाला, नरेंद्र सिंह, बलराम पांडे, टुनटुन पाठक, शिवपूजन पाठक, अरुण सिंह, अशोक वर्मा, अखौरी मदन प्रसाद, तबला वादक गोपाल अंबेडकर, बैंजो वादक संजय पासवान, ललित सिंन्हा के अलावे अन्य लोग उपस्थित थे।


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