ट्रैक्टर ले जाने में हुई विवाद में इलाज के क्रम में वृद्ध की मौत, परिजनों का पुलिस पर लापरवाही का गंभीर आरोप
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Dec 05, 2025
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कुदरा थाना क्षेत्र के डेरवा गांव में पुरानी रंजिश में चले लाठी-डंडे व ईंट-पत्थर, से दर्जन भर लोग हुए थे घायल
जिला संवाददाता संदीप कुमार की रिपोर्ट
कैमूर-- कुदरा थाना क्षेत्र के डेरवा गांव में बुधवार को मामूली बात पर शुरू हुआ विवाद खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया था। गली से ट्रैक्टर ले जाने को लेकर हुई कहासुनी ने पुरानी रंजिश की आग में घी का काम किया, जिसके बाद दो पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर चले। इस हिंसक झड़प में जहां लगभग एक दर्जन लोग घायल हो गए, वहीं इलाज के दौरान एक वृद्ध की मौत हो गई है। घटना के बाद मृतक के परिजनों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे मामला और गरमा गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाद की मुख्य वजह गली से ट्रैक्टर निकालने के दौरान दीवार पर खरोंच आना बताई जा रही है। गांव के राम इकबाल सिंह और गोपाल सिंह के पक्ष के बीच सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने और अवैध खनन के विरोध को लेकर पहले से ही तनाव चल रहा था। बुधवार को जब ट्रैक्टर ले जाने को लेकर कहासुनी हुई, तो दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे चलने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए घटनास्थल से एक कट्टा (हथियार) भी बरामद किया है। घायलों में एक पक्ष से विजय शंकर सिंह, राम इकबाल सिंह, अंकित सिंह, शांति देवी और नीलम देवी शामिल हैं, जबकि दूसरे पक्ष से गोपाल सिंह, हरेंद्र सिंह, उपेंद्र सिंह और श्रीराम सिंह घायल हुए। सभी घायलों को पुलिस ने आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुदरा पहुंचाया। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए कुछ घायलों को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। इसी क्रम में गोपाल सिंह के पक्ष के 64 वर्षीय श्रीराम सिंह (पुत्र स्व. विश्वनाथ सिंह) की हालत बिगड़ गई और वाराणसी में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। श्रीराम सिंह की मौत के बाद उनके परिजनों का गुस्सा पुलिस प्रशासन पर फूट पड़ा है। मृतक पक्ष के लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने घायल अवस्था में भी श्रीराम सिंह को अस्पताल ले जाने के बजाय काफी देर तक थाने में बैठाए रखा। समय पर उचित इलाज न मिल पाने के कारण ही उनकी मृत्यु हुई। परिजनों का यह भी आरोप है कि जब वे मामला दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो पुलिस ने टालमटोल की। आरोप है कि पुलिस ने पहले दूसरे पक्ष का केस दर्ज किया और मृतक पक्ष की एफआईआर बाद में लिखी गई।
जानते हैं क्या कुछ प्रशासन ने कहां
इस मामले में पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। दोनों पक्षों की तरफ से आवेदन प्राप्त हुए हैं, और एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हथियार बरामदगी और मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी है।


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