राष्ट्र का दुर्भाग्य अब तो समाज व राष्ट्र में वैमानस्यता फैलाने वाले का भी किया जा रहा चुनावी जनसभा में सत्कार

चैनपुर विधानसभा में भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर रावण ने मजनू गोंड के पक्ष में चुनावी जन सभा को किया संबोधित

अनुमंडल संवाददाता सिगासन सिंह यादव की रिपोर्ट 

भभुआं(कैमूर)-- बिहार विधानसभा 2025 के चुनाव को लेकर प्रदेश की सियासत अब गरमाने लगी है। इसी कड़ी में शनिवार को चैनपुर विधानसभा क्षेत्र के नगर पंचायत हाटा के हाई स्कूल मैदान में भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण ने एक चूनावी जनसभा को संबोधित किया।सभा में दूर-दराज़ से उसके चाहने वालों हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। मैदान में चहेतों की उत्साह देखते ही बन रहा था। मंच पर पहुंचते ही चंद्रशेखर रावण के स्वागत में जय भीम और चन्द्र शेखर रावण जिंदाबाद के नारे गूंज उठे।

बहुत ही सोचनीय विषय

अपने संबोधन में चंद्रशेखर रावण ने कहा कि अब समय आ गया है जब समाज को अपनी ताकत पहचाननी होगी। उन्होंने कहा कि वर्षों से वंचित और शोषित समाज को अब जागना होगा और अपने अधिकारों की लड़ाई खुद लड़नी होगी।

जबकि देखा जाए तो इसके समाज के लोग ऐसे ही नेतृत्व कर्ताओं की वजह से वंचित व शोषित है। दलितों के नाम पर मिलने वाली सुविधाओं का ऐसे लोग ही बार बार लाभ उठा रहे हैं, जबकि जो निचले पायदान पर है सरकार द्वारा चलाई जा रही सुविधाओं का लाभ उनसे कोसों दूर है।

उन्होंने जनता से अपील की कि इस बार के चुनाव में भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी को मजबूती दें ताकि गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग की आवाज़ विधानसभा में बुलंद की जा सके।

वही देखा जाए तो भीम आर्मी (ईसाई धर्मावलंबी) दलित पिछड़ों के नाम पर सूविधाओं की भोग, गुंडागर्दी कर समाज में जहर उत्पन्न करने के अलावा कुछ भी नहीं किया, आरक्षण के लाभ लेने के लिए यह दलित बनते हैं अन्यथा ईसाई धर्म के गुलाम है। वही धरातल पर देखा जाए तो दलितों को राष्ट्र में आगे बढ़ाने के लिए सभी सीमाओं को तोड़कर जहां सवर्ण समाज के 90% 95% अंक आने के बावजूद भी कई पदों पर आसक्त नहीं किया जाता जबकि दलित के नाम पर 25% 30% अंक प्राप्त करने के बावजूद भी उस पद पर आसक्त कर दिया जाता है। 

रावण ने विशेष तौर पर चैनपुर विधानसभा सीट से पार्टी के प्रत्याशी मजनू गोंड को विजयी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मजनू गोंड जनता के सच्चे सिपाही हैं, जो समाज की भलाई और समान अधिकारों की लड़ाई में हमेशा आगे रहे हैं।

अपने भाषण में चंद्रशेखर रावण ने कहा —

“हमारे समाज को अब और ठगा नहीं जा सकता। हमने बहुत बार वादे सुने, अब हमें हक चाहिए। जब तक हमारे बच्चे, हमारी बहनें, हमारे नौजवान बराबरी की जगह नहीं पाएंगे, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”

सभा के दौरान रावण ने शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जाति और धर्म से ऊपर उठकर इंसाफ की राजनीति करना चाहती है।

जबकि देखा जाए तो जिस समाज को ठगने की बात उसके द्वारा किया जा रहा है,वो समाज ही सभी को जातिगत आरक्षण व एस सी एस टी एक्ट के तहत ठग रहा है। जहां तक शिक्षा, रोजगार में बराबरी की बात है तो जाति के आधार पर छूट पाना कभी भी बराबरी में खड़ा नहीं कर सकता। जाति, धर्म के तहत हमेशा इसके संगठन भीम आर्मी के द्वारा हमेशा द्वेष फैलाकर राजनीति किया जाता है।

 कई स्थानों से आई महिलाओं, युवाओं और तथाकथित किसानों ने भीम आर्मी के समर्थन में नारे लगाए। मंच पर पार्टी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

चंद्रशेखर रावण ने अंत में कहा कि अगर जनता इस बार सचेत होकर वोट देगी तो 2025 का चुनाव सामाजिक परिवर्तन की दिशा तय करेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि मजनू गोंड को भारी बहुमत से विजयी बनाएं, ताकि दलित-पिछड़ा समाज की आवाज़ विधानसभा में गूंज सके। जबकि दलित पिछड़ों की आवाज हमेशा से विधानसभा में गूंजते रहा है

सभा समाप्ति के बाद रावण कार्यकर्ताओं से मिला और उन्हें बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने के निर्देश दिए।

हाटा हाई स्कूल का मैदान रावण के नारों और जय भीम के जयघोष से देर तक गूंजता रहा, जो यह संदेश दे रहा था कि 2025 के चुनाव में भीम आर्मी का प्रभाव अब तेजी से बढ़ रहा है।

क्या राष्ट्र का कानून व्यवस्था सही है

एक तरफ तो उनके द्वारा संविधान व भीमराव की जयकारा लगाया जाता है और कहा जाता है कि संविधान निर्माता भीमराव है जबकि इस संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2018 में एससी एसटी एक्ट पर संशोधन एवं दलित वर्ग को शोषित वंचितों को ऊपर उठने के लिए 2023 में दलित वर्ग को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का निर्देश जारी किया गया था जिसके विरोध इन्हीं के संगठन द्वारा सर्वप्रथम किया जाने लगा। यदि सच में देखा जाए तो इन सभी के द्वारा अपनी सिर्फ फायदा देखा जाता है शोषण वंचितों को शोषित वंचित रखकर ही अपने राजनीति साधने का कार्य किया जाता है।
यदि देखा जाए तो राष्ट्र का कानून व्यवस्था ही सही नहीं है जो ऐसे दंगाइयों का समर्थन करता है। यदि सच में देखा जाए तो ऐसे लोगों को लोकतंत्र के तहत संगठन व पार्टियां बनाने की अधिकार ही राष्ट्र की विनाश का कारण है।

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