अधिकारियों की मिली भगत से भूमि कब्जा कर रहे, दबंग को रोकने के कारण सुनियोजित साजिश के तहत दलित एक्ट सहित छेड़खानी का मामला हुआ दर्ज

जिला पदाधिकारी व आरक्षी अधीक्षक को आवेदन सौंप पीड़ित ने न्याय हेतु लगाई गुहार

अंचल कार्यालय सहित स्थानीय थाना दलालों की गिरफ्त में

अखिल भारतीय समाचार टीम

कैमूर---- जिला पदाधिकारी व कैमूर आरक्षी अधीक्षक को आवेदन सौंप पीड़ित ने लगाई न्याय हेतु गुहार, कहां स्थानीय अधिकारियों की मिली भगत से भूमि पर अवैध कब्जा व अंचल कार्यालय में कार्यरत प्रधान लिपिक द्वारा रिश्वत लेने के विरुद्ध आवाज उठाने के कारण अंचलाधिकारी, थानाध्यक्ष व प्रधान लिपिक कि मिली भगत से, सुनियोजित साजिश के तहत भूमि लुटवाने हेतु दर्ज करवाया गया, दलित एक्ट सहित छेड़खानी की मामला।

आपको बताते चलें कि जिला अंतर्गत कुदरा अंचल स्थित मौजा देवराढ़ कलां, थाना क्रमांक-- 643 खाता संख्या 06, प्लॉट संख्या 1545, रकबा 2.05 डिसमिल भूमि नीतू कुमारी पति सूर्यकांत तिवारी के नाम पर दर्ज हैं।जो 4 फरवरी 2023 को क्रय की गई है।जिस भूमि का दाखिल-खारिज, शुद्धिपत्र और मालगुजारी रसीद भी नीतू कुमारी के नाम पर अंकित है। जिस भूमि को हड़पने की नीयत से उक्त गांव के निवासी सुरेंद्र चौधरी द्वारा बार-बार प्रयास किया जा रहा है, जिस मामले को लेकर दोनों पक्षों में विगत वर्षों से विवाद चल रहा है। पीड़ित पक्ष को दलित एक्ट की धमकी देकर सुरेंद्र चौधरी द्वारा जबरन कब्जा किया जा चुका है। वही सुरेंद्र चौधरी का आरोप है, कि उनके भूमि का पैसा दिया गया है। जिनके द्वारा पूर्व में भी कई बार दलित एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसे कोर्ट द्वारा साजिश करार देते हुए निरस्त किया गया। पूर्व में मामला उपसमाहर्ता मोहनियां की अदालत में चल रहा था, पर उपसमाहर्ता की अदालत भी निष्पक्ष फैसला देने में असमर्थ रहा। अंततः मामला सिविल कोर्ट मोहनियां में लंबित है। पर सुरेंद्र चौधरी द्वारा विगत , सप्ताह विवादित भूमि पर गृह निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया। जिसे रोकने हेतु पीड़ित द्वारा लगभग 2 सप्ताह तक थाना एवं अंचल का चक्कर लगाया गया। पर जब कहीं से कोई कार्रवाई नहीं दिखा तो अंततः पीड़ित द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी सहित जिला पदाधिकारी से गुहार लगाया गया। विगत शुक्रवार को जिला पदाधिकारी द्वारा संबंधित अधिकारियों को शांति व्यवस्था बनाए रखते हुए 144 लगाने हेतु निर्देशित किया गया। पीड़ित का आरोप है, कि जिला पदाधिकारी के निर्देशों के बावजूद भी 144 लगाने हेतु अनुशंसा की कागजात आगे बढ़ाने हेतु राजस्व कर्मी ने रिश्वत के तौर पर 500 रूपए नगद लिया, तो अंचल के प्रधान लिपिक बाढ़ु राम के द्वारा भी रिश्वत की मांग किया गया। जब पीड़ित ने कहा की हमारे पास पैसा नहीं है, तो प्रधान लिपिक ने कहा की बिना पैसे का कुछ भी नहीं होगा। अंततः पीड़ित द्वारा अपनी पत्नी की खाते से फोन पे के माध्यम से 500 रूपए बाढ़ु राम के खाते पर मंगाया गया। जिसके दो मिनट के बाद ही बाढ़ु राम के द्वारा व्हाट्सएप के मध्यम से 144 लगाने हेतू अनुशंसा की कागजात भेजा गया। विगत शनिवार को पीड़ित ने रिश्वत देने की बात मीडिया के समक्ष रखते हुए, साक्ष्य के साथ प्रस्तुत किया। वही मीडिया के द्वारा जब अंचल पदाधिकारी से बात किया गया, तो उनके द्वारा विश्वास जनक जवाब नहीं दिया गया, वह उनके द्वारा प्रधान लिपिक को बोला गया कि ऑनलाइन पैसा नहीं लेना चाहिए। जब पीड़ित ने कहा कि पूर्व में भी हमारे ऊपर एससी एसटी एक्ट का झूठा मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है, तो मौके पर मौजूद प्रभारी थाना अध्यक्ष इरफान खान द्वारा कहां गया कि पुनः दलित एक्ट में मामला दर्ज हो सकता है।

मामला अनुमंडल पदाधिकारी मोहनियां रत्ना प्रियदर्शनी के संज्ञान में आने के बाद विवादित भूमि पर शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु 144 लागू किया गया।उपरांत प्रधान लिपिक द्वारा रिश्वतखोरी की लेन देन की मामले में जांच कर उचित कार्रवाई हेतु आश्वस्त किया गया।

जिसके बाद पीड़ित का आरोप है की व्हाट्सएप कॉलिंग के माध्यम से अंचलाधिकारी विवेक कुमार व रास्ते में रोककर प्रधान लिपिक द्वारा धमकी दिया गया, की हम सभी के पक्ष में सकारात्मक बयान नहीं देंगे और धारा 144 की कार्रवाई वापस लेने के लिए तैयार नहीं होंगे, तो आप सहित पूरे परिवार को झूठे मुकदमे में फंसा दिया जाएगा। मामले में प्रधान लिपिक द्वारा कही गई बात की ऑडियो भी प्रस्तुत किया गया। संबंध में उन्होंने 27 सितंबर को कुदरा थाना में सनहा दर्ज कराने हेतु आवेदन दिया। जिसके अगले ही दिन 28 सितंबर को अंचलाधिकारी, प्रभारी थाना अध्यक्ष सहित प्रधान लिपिक द्वारा प्रायोजित साजिश के तहत सुरेंद्र चौधरी और उनकी पुत्री की ओर से पीड़ित व पीड़ित परिवार के विरुद्ध दलित एक्ट सहित छेड़खानी का मामला दर्ज करा दी गई। उन्होंने इसे प्रायोजित और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की हैं। साथ ही जिला पदाधिकारी से 26 सितंबर को 144 की कार्रवाई, 27 सितंबर को सनहा हेतु आवेदन, 28 सितंबर को दलित एक्ट व छेड़खानी का मामला दर्ज करने संबंधित कार्रवाई तथा अंचल कर्मियों पर अपने द्वारा लगाए गए रिश्वत संबंधी आरोपों की जांच किसी वरीय पदाधिकारी से कराने की मांग की है। साथ ही जांच में दर्ज मामला झूठी या दुर्भावनापूर्ण पाई जाती है तो नियमानुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जाए और उन्हें तथा उनके परिवार को आवश्यक कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए। मौके पर उपस्थित परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा उच्च पदाधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई हेतु अनुरोध किया गया।

अंचल कार्यालय दलालों की गिरफ्त में

वहीं यदि देखा जाए तो आए दिन अंचल परिसर व अंचल कार्यालय में आने वाले पीड़ितों की समस्याएं तत्काल निदान न कर बार-बार दौड़ाया जाता है। जहां दलालों की भरमार रहती है राजस्व कर्मियों द्वारा रखे गए दलालों द्वारा पीड़ितों को भरमाकर धन उगाही किया जाता है। वही सूत्रों की मानें तो अवैध कमाई दलालों के ही माध्यम से किया जाता है, जिसमें अंचलाधिकारी का भी हिस्सा सम्मिलित होती है। वही कैमूर आरक्षी अधीक्षक के दलालों पर रोक की कड़े निर्देश के बावजूद भी कुदरा थाना में दलालों की आवागमन नहीं रूक पा रही है।

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