दूध बेचने से महापौर तक: कौन हैं नारायण चौधरी
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Feb 20, 2026
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जिनकी बगावत ने बदल दिए भिवंडी के समीकरण।
भाजपा से बगावत कर सेकुलर गठबंधन के समर्थन से बने महापौर
स्थानीय राजनीति में 25 साल का सफर
भिवंडी। भिवंडी निजामपुर महानगरपालिका के 20. फरवरी शुक्रवार को हुए महापौर चुनाव में सबसे बड़ा नाम बनकर उभरे नारायण रतन चौधरी अब शहर के प्रथम नागरिक बन गए हैं। भाजपा से बगावत कर सेकुलर गठबंधन के समर्थन से महापौर बनने वाले चौधरी की जीत ने न केवल स्थानीय राजनीति बल्कि पूरे महाराष्ट्र में चर्चा छेड़ दी है। उनकी राजनीतिक चाल की तुलना कई लोग एकनाथ शिंदे की बगावत से कर रहे हैं, जिन्होंने 2022 में उद्धव ठाकरे से अलग होकर सत्ता का समीकरण बदल दिया था।
महापौर चुनाव में भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार बदले जाने के बाद नारायण चौधरी ने पार्टी से बगावत कर दी और कांग्रेस तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के समर्थन से चुनाव मैदान में उतर गए। उन्हें कुल 48 मत मिले और वे स्पष्ट बहुमत के साथ महापौर निर्वाचित हुए। इस जीत ने भाजपा को बड़ा झटका दिया और शहर की राजनीति में नया समीकरण स्थापित हो गया।
दूध बेचने से शुरू हुआ सफर.......
करीब 25 वर्षों से सक्रिय नारायण चौधरी की राजनीतिक यात्रा काफी संघर्षपूर्ण रही है। भिवंडी के तडाली क्षेत्र के निवासी चौधरी ने अपने जीवन की शुरुआत दूध के व्यवसाय से की थी। बाद में उन्होंने निर्माण क्षेत्र में कदम रखा और आज वे “नारायण डेवलपर्स” नामक निर्माण कंपनी से जुड़े बताए जाते हैं। स्थानीय स्तर पर मेहनत और संगठनात्मक सक्रियता के कारण उन्होंने धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। दूध बेचने वाले एक साधारण कार्यकर्ता से महापौर बनने तक का उनका सफर शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
2002 से शुरू हुई राजनीति.......
नारायण चौधरी ने वर्ष 2002 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और पहली बार नगरसेवक चुने गए। वर्ष 2002 से 2007 तक वे भिवंडी विकास आघाड़ी से नगरसेवक रहे। इसके बाद 2007 से 2012 के बीच उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की। वर्ष 2012 में वे समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। इसी दौरान 2012 से 2017 के बीच उनकी पत्नी अलका चौधरी समाजवादी पार्टी से नगरसेवक रहीं। बाद में चौधरी शिवसेना में शामिल हुए और लंबे समय तक सक्रिय रहे। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच 2025 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और इसी पार्टी के टिकट पर नगरसेवक निर्वाचित हुए।
भाजपा से बगावत बनी जीत की वजह....
इस बार पहली बार भाजपा ने उन्हें महापौर पद का उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवार बदलने के फैसले से चौधरी नाराज हो गए। इसके बाद उन्होंने बगावती रुख अपनाया और कांग्रेस नेतृत्व वाले सेकुलर गठबंधन के समर्थन से चुनाव लड़ा। महापौर चुनाव में उन्हें 48 मत मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार स्नेहा पाटिल को 16 और कोणार्क विकास आघाड़ी के विलास पाटिल को 25 मत प्राप्त हुए। इस परिणाम ने भाजपा की रणनीति को पूरी तरह विफल कर दिया।
‘किंगमेकर’ की भी चर्चा......
स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाल्या मामा की भूमिका अहम रही और उन्हें इस चुनाव का “किंगमेकर” माना जा रहा है।
नारायण चौधरी अब भिवंडी के महापौर के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर शहर का प्रथम नागरिक बनने की उनकी कहानी फिलहाल भिवंडी की राजनीति की सबसे चर्चित कहानी बन गई है।


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