भिवंडी मनपा क्षेत्र में 30 प्रतिशत मतदाता होने के बावजूद उत्तर भारतीय समाज उपेक्षित

भिवंडी। भिवंडी- निजामपुर शहर महानगरपालिका चुनाव में उत्तर भारतीय समाज की उपेक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। पालिका क्षेत्र में लगभग 30 प्रतिशत मतदाता उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और गांवों से आए नागरिकों के हैं, जो वर्षों से कांग्रेस, भाजपा और समाजवादी पार्टी को मतदान करते आ रहे हैं। इसके बावजूद टिकट वितरण में इस समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है। चुनाव के दौरान रैलियों, प्रचार और जनसंपर्क में सक्रिय भूमिका निभाने वाले उत्तर भारतीय मतदाताओं का कहना है कि उन्हें केवल भीड़ जुटाने और मतदान प्रतिशत बढ़ाने तक सीमित रखा जाता है। सम्मान और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी की अपेक्षा के बावजूद हर चुनाव में उन्हें नजरअंदाज किया जाता है। चुनावी उम्मीदवार के आंकड़ों पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी ने प्रभाग 3 (क) से संतोष कुमार राय को प्रत्याशी बनाया है। राकांपा (अजीत पवार गुट) ने प्रभाग 8 (ड) से अर्जुन महेन्द्र गुप्ता तथा प्रभाग 11 (ड) से अजय राजेन्द्र श्रीवास्तव को टिकट दिया है। कांग्रेस ने प्रभाग 20 (ड) से जितेन्द्र हरिनाथ पाल को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने प्रभाग 16 (ब) से ठाकुर क्षमा मनोज को प्रत्याशी बनाया है।

इसके अलावा प्रभाग 3 (ब) से शिवानी नरेन्द्र सिंह और प्रभाग 22 (ब) से स्नेहा मनोज सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मुकाबले में हैं। इस प्रकार प्रमुख राजनीतिक दलों से सीमित संख्या में ही उत्तर भारतीय समाज के उम्मीदवार मैदान में उतारे गए हैं। शहर में उत्तर भारतीय समाज के कई सामाजिक संगठन सक्रिय हैं। सांसद और विधायक चुनावों के दौरान इन संगठनों के कार्यक्रमों में समाज के सफेद पोश नेताओं की मौजूदगी रहती है, लेकिन समाज के लोगों का कहना है कि टिकट वितरण और सत्ता में भागीदारी के समय पार्टियां उन्हें भुला देती है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि उत्तर भारतीय मतदाताओं को हर चुनाव में पक्का वोट बैंक मानकर केवल राजनीतिक गणित के लिए इस्तेमाल किया जाता है। विरोध करने पर उन्हें उपेक्षा और दबाव का सामना करना पड़ता है। डइस बार चुनावी माहौल में उत्तर भारतीय समाज के बीच नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। समाज के लोगों का कहना है कि यदि प्रतिनिधित्व की स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले चुनावों में वे अपने राजनीतिक रुख पर पुनर्विचार कर सकते हैं। भिवंडी महानगरपालिका चुनाव के साथ यह मुद्दा अब व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

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