पैरवी संस्था के तत्वावधान में हितधारकों की महत्वपूर्ण बैठक
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Dec 17, 2025
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संवाददाता पारसनाथ दुबे
डेहरी ऑन सोन। सामाजिक संस्था पैरवी के तत्वावधान में आज डेहरी ऑन सोन में ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति को सशक्त एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से हितधारकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पंचायती राज प्रतिनिधि, पत्रकार, अधिवक्ता, बाल कल्याण समिति के सदस्य तथा सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान बाल तस्करी की बढ़ती घटनाओं, रेस्क्यू-केंद्रित नीतियों की सीमाओं और ग्राम स्तर पर रोकथाम तंत्र की विफलता पर गंभीर चर्चा की गई।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डेहरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक सोनू सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी सरकार बच्चों के हर प्रकार के अधिकारों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके सुरक्षित, सम्मानजनक तथा अधिकार-संपन्न विकास के बिना समावेशी समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताते हुए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की और आश्वासन दिया कि बाल संरक्षण से जुड़े हर सकारात्मक पहल को उनका पूरा समर्थन मिलता रहेगा।
बैठक को संबोधित करते हुए बाल अधिकार कार्यकर्ता संतोष उपाध्याय ने कहा कि मिशन वात्सल्य के तहत ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति को बाल संरक्षण की रीढ़ माना गया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश गांवों में यह समिति केवल कागज़ों तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को बाल तस्करी, बाल श्रम, बाल विवाह और संकटग्रस्त बच्चों की पहचान की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें ही अपनी जवाबदेही का स्पष्ट बोध नहीं है। उन्होंने कहा कि आज बाल तस्करी लगातार जारी है। रेस्क्यू हो रहा है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। यदि गांव स्तर पर ही प्रभावी रोकथाम हो, तो रेस्क्यू की आवश्यकता ही नहीं पड़े।
पैरवी संस्था के प्रतिनिधि दीनबंधु वत्स ने कहा कि बाल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार और समाज मिलकर ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति को सक्रिय, प्रशिक्षित और जवाबदेह नहीं बनाते, तब तक मिशन वात्सल्य अपने उद्देश्य को हासिल नहीं कर पाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि रेस्क्यू से पहले रोकथाम ही प्रभावी बाल संरक्षण की कुंजी है और इसकी शुरुआत गांव से ही होनी चाहिए। प्रशासनिक उदासीनता और सामाजिक चुप्पी, दोनों ही बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा हैं।
प्रधान प्रोबेशन ऑफिसर प्रशांत कुमार बीस्ट ने मुहल्ला पुस्तकालय खोलने पर जोर देते हुए कहा कि सोशल मीडिया बच्चों की मनोवृत्ति को दूषित कर रहा है। पढ़ने की प्रवृत्ति से इसे ठीक किया जा सकता है।
बाल कल्याण समिति के सदस्य ददन जी पाण्डेय ने कहा कि समिति के समक्ष आने वाले अधिकांश मामलों में यह स्पष्ट होता है कि यदि ग्राम स्तर पर समय रहते हस्तक्षेप किया गया होता, तो बच्चा तस्करी या शोषण का शिकार नहीं बनता। उन्होंने कहा कि जब बच्चा बाल कल्याण समिति तक पहुंचता है, तब तक वह शोषण, विस्थापन और मानसिक आघात से गुजर चुका होता है।
डॉ निर्मल ने कहा कि असली सफलता तब होगी, जब एक भी बच्चा गांव से तस्करी के लिए बाहर न जा पाए। पहला सुरक्षा घेरा गांव है और अंतिम सुरक्षा कवच बाल कल्याण समिति।
तिलौथु पूर्वी की मुखिया पुनीता द्विवेदी ने कहा कि ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति का गठन तो कर दिया जाता है, लेकिन सदस्यों को न तो किशोर न्याय कानून की पर्याप्त जानकारी दी जाती है और न ही यह बताया जाता है कि संदिग्ध मामलों में किसे और कैसे सूचना देनी है।
रिंकी कुमारी ने कहा कि केवल आदेश जारी कर देने से कोई समिति प्रभावी नहीं बनती। इसके लिए प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और निरंतर निगरानी आवश्यक है।
आर पी एफ इन्स्पेक्टर रामबिलास राम ने कहा कि हमारी पुलिस रेलवे स्टेशनों पर पूरी मुस्तैदी से बच्चों की व्यवस्था में लगी रहती।
सामाजिक कार्यकर्ता संजय पासवान ने कहा कि बच्चों को सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचाने के लिए प्रभावी कानून की जरूरत है।
बैठक में वक्ताओं ने ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति के सभी सदस्यों के अनिवार्य प्रशिक्षण, समितियों की नियमित बैठक एवं रिपोर्टिंग, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों और पलायन कर रहे परिवारों की ग्राम स्तर पर निगरानी व्यवस्था तथा पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनवाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं, महिला एवं किशोर समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की।
इस अवसर पर एडवोकेट चंद्रिका राम, एडवोकेट पंकज सिंह, एडवोकेट गोपाल ठाकुर, नागेंद्र यादव (मुखिया), सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।


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