शिफ्टिंग के बहाने बेच दिया पीली म्युनिसिपल स्कूल का कीमती सामान

जांच समिति गठित कर तीन शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस, , FIR दर्ज करने की मांग


भिवंडी। भिवंडी शहर के निजामपुरा इलाके में स्थित पीली स्कूल में बड़ा घोटाला सामने आया है।जहां पर स्कूल का कीमती शैक्षणिक और लोहे का सामान “शिफ्टिंग” के नाम पर स्क्रैप डीलर को बेच दिया गया।मामले के उजागर होने के बाद मनपा प्रशासन ने तीन शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। डिप्टी कमिश्नर (शिक्षा) बालकृष्ण क्षिरसागर के निर्देश पर 27 अक्टूबर को की गई।प्रशासन के अनुसार 29 सितंबर 2025 के आदेश के तहत पीली स्कूल का सामान मनपा की पुरानी इमारत के पांचवीं मंजिल पर स्थानांतरित किया जाना था। लेकिन संबंधित कर्मचारियों ने नियमों को तोड़ते हुए सामान को किसी और स्थान पर भेज दिया।

मिली जानकारी के अनुसार 19 अक्टूबर की दोपहर लगभग दो बजे स्कूल के लोहे के ग्रिल, दरवाजे, रैक और अन्य सामान को एक टेंपो में भरकर स्क्रैप डीलर को बेचा जा रहा था। मौके पर मौजूद नागरिकों ने जब टेंपो को रोका और पूछताछ की, तो एक कबाड़ी ने बताया कि “यह सामान बिलाल सर ने 700 रुपये में बेचा है।” नागरिकों ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।घटना सामने आते ही शिक्षा विभाग और प्रशासन में खलबली मच गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि “जनता के टैक्स से खरीदा गया कीमती सामान अधिकारियों और शिक्षकों की मिलीभगत से बेचा जा रहा है।”

पूर्व नगरसेवक फ़राज़ बहाउद्दीन बाबा मौके पर पहुंचे और टेंपो को वार्ड अधिकारियों के हवाले कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि “यह कोई छोटी लापरवाही नहीं, बल्कि योजनाबद्ध चोरी है। स्कूल के दरवाजे और अलमारियां बेची जा रही थीं, जबकि स्कूल को गिराने का कोई आदेश नहीं था।” उन्होंने यह भी कहा कि “इसी स्कूल में कुछ महीने पहले आग लगने का नाटक कर रिकॉर्ड जलाया गया था, मगर आज तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई।”

फ़राज़ बाबा ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं हुआ है। नागरिकों का कहना है कि जब्त टेंपो को भी “सौदेबाजी” के बाद छोड़ दिया गया।

शिक्षा विभाग के प्रशासनिक अधिकारी सौदागर शेखरे ने बताया कि “शिक्षक सेवक, इंचार्ज और सीआरसी को नोटिस जारी किया गया है। यदि तीन दिन में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिक पूछ रहे हैं कि यदि यह केवल “शिफ्टिंग” थी, तो निगम की ट्रांसपोर्ट गाड़ियां क्यों नहीं लगाई गईं? इस प्रक्रिया का कोई रिकॉर्ड क्यों नहीं बनाया गया? और रविवार व दिवाली की छुट्टी के दिन ही सामान क्यों हटाया गया?

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले भी पीली स्कूल में रहस्यमय आग लगने की घटना हुई थी, जिसमें स्कूल का सारा रिकॉर्ड जल गया था। अब इस नए प्रकरण के बाद  डिप्टी कमिश्नर (शिक्षा) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है।यह समिति सामान की बिक्री, रिकॉर्ड जलने और संभावित मिलीभगत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।शहर के नागरिकों के बीच अब यही सवाल गूंज रहा है “क्या प्रशासन सिर्फ नोटिस देकर मामला रफा-दफा करेगा, या दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी होगी?”

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