राजद प्रत्याशी श्वेता सुमन का नामांकन हुआ रद्द, राजनीतिक हलचल तेज
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Oct 22, 2025
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नासमझ प्रत्याशी का मीडिया पर दोषारोपण
प्रत्याशी के पक्ष में महागठबंधन की स्थानीय भुप सहित महागठबंधन की योग्यता भी सवालों के घेरे में
जिला संवाददाता संदीप कुमार की रिपोर्ट
कैमूर-- जिला अंतर्गत मोहनियां विधानसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की प्रत्याशी श्वेता सुमन का नामांकन हुआ रद्द, वही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चुनाव पदाधिकारी ने श्वेता सुमन के नामांकन को निवास प्रमाण पत्र के आधार पर अमान्य घोषित कर दिया है।
इस फैसले के बाद श्वेता सुमन ने इसे "लोकतंत्र की हत्या" करार के साथ सरकार पर साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए,ना समझी कि वजह से मीडिया को भी दलालों के रूप में चिह्नित करने का किया प्रयास
आरोप
"यह सब सरकार के इशारे पर किया गया है। मुझे साजिश के तहत चुनाव से बाहर किया गया।" उन्होंने इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है। श्वेता सुमन ने भाजपा और उसके उम्मीदवार पर डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मेरा भी जाति प्रमाण पत्र लगा हुआ था, लेकिन मेरा नहीं हुआ। क्यों? क्योंकि भाजपा को और उनके उम्मीदवार को मुझसे डर है, मेरी पार्टी से डर है और राष्ट्रीय जनता दल के सरकार आने से डर है। इसलिए वे अन्याय कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर कहा गया कि वह यूपी की मूल निवासी हैं, जबकि वह पिछले 20 सालों से बिहार में रह रही हैं। श्वेता सुमन के समर्थक इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध मान रहे हैं।श्वेता सुमन ने वर्तमान विधायक पर भी गंभीर आरोप लगाए, उन्हें "निकम्मी और घूसखोर महा भ्रष्ट विधायक" बताया। उन्होंने कहा कि विधायक गर्व से कहती हैं कि वह मोहनिया की पहली विधायक हैं, लेकिन पहली ऐसी भ्रष्ट विधायक बनीं, जिसने हर विभाग से और यहां तक कि साथ में चले लोगों से भी कमीशन लिया। इस घटनाक्रम ने मोहनियां विधानसभा चुनाव को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
नासमझ प्रत्याशी का मीडिया पर भी आरोप
प्रत्याशी द्वारा मिडिया को भी तूच्छ शब्दों से नवाजा गया, यदि मिडिया अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे तो -प्रत्याशी के पक्ष में महागठबंधन की स्थानीय भुप सहित महागठबंधन की योग्यता भी सवालों के घेरे में -
जिला में राजद के स्थानीय भूपों सहित महागठबंधन की योग्यता सवालों के घेरे में- क्या अनपढ़ होने की ठप्पा लगने वाली पार्टी दामन से अनपढ़ होने की दाग हटा पाएगा?
क्या राजद सहित महागठबंधन में योग्यता की कमी है? हर जगह नामांकन किया जा रहा है और नामांकन में लगने वाले दस्तावेजों की विधायक जैसे पदों पर आसक्त होने वाले प्रत्याशी सहित पार्टी व महागठबंधन के संयोजक को जानकारी न होना योग्यता सवालों के घेरे में है। राजद प्रत्याशी श्वेता सुमन का जैसे हैं नामांकन रद्द हुआ उनके द्वारा विलाप करते हुए भाजपा पर तो आरोप लगाया ही गया, पर उनके द्वारा मीडिया के को भी तूच्छ शब्दों से नवाजा गया। पर सच कहा जाए तो आरक्षित सीट आरक्षित प्रत्याशी योग्यता की कमी नामांकन में लगने वाले दस्तावेजों की जानकारी ना हो पाना नामांकन रद्द होने का मुख्य कारण बताया जा रहा है। वही इससे प्रमाणित होता है कि महागठबंधन के द्वारा बार-बार जैसे जातिगत जनगणना के साथ ही जातिगत आरक्षण की बढ़ोतरी पर दबाव बनाया जाता है, नासमझ अनपढ़ जाति देखकर सत्ता में बने रहने के लिए कुछ भी अनाप-शनाप कार्य किया जाता है। यानी महागठबंधन के अंदर योग्यता की कमी है जिस वजह से अयोग्यता आरक्षण का पैरवी किया जाता है।
वहीं सूत्रों की माने तो स्थानीय राजद भूप कुछ छोड़ दिया जाए तो महागठबंधन के किसी भी नेतृत्व कर्ता द्वारा श्वेता सुमन कि जगह छेदी पासवान के सुपुत्र को का समर्थन किया जा रहा था, अंततः यह देखने को मिला कि 24 घंटा बीत भी नहीं पाया राजद के मुख्य नेतृत्वकर्ताओं द्वारा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरे हुए छेदी पासवान के सुपुत्र रवि पासवान का समर्थन किया गया।


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