फतेहपुर तरियानी हाई स्कूल में जागरूकता शिविर का आयोजन
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Jun 27, 2026
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ब्यूरो चीफ अंकित कुमार की रिपोर्ट
शिवहर-- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के आलोक में, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), शिवहर द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकार शिवहर के अध्यक्ष सह प्रधान जिला न्यायाधीश दीपक कुमार के निर्देशानुसार और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सह न्यायाधीश ललन कुमार रजक के आदेशानुसार ठाकुर रामानन्दं राजेंद्र उच्च माध्यमिक विद्यालय फतहपुर तरियानी शिवहर के प्रांगण में एक दिवसीय कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
'जागृति स्कीम' के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय "सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य" था, जिसके तहत विद्यालय के छात्र-छात्राओं को 'यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012' (POCSO Act) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मोहन कुमार के द्वारा बताया गया कि पॉक्सो अधिनियम साल 2012 में बनाया गया एक विशेष कानून है। इसका मुख्य उद्देश्य 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी से सुरक्षा प्रदान करना है।इस कानून के प्रति समाज, माता-पिता और शिक्षकों में जागरूकता होना बेहद ज़रूरी है ताकि बच्चों को एक सुरक्षित माहौल दिया जा सके।
उन्होंने बताया कि यदि किसी भी व्यक्ति (चाहे वह डॉक्टर, शिक्षक, पड़ोसी या परिवार का सदस्य हो) को यह पता चलता है या केवल संदेह भी होता है कि किसी बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न हुआ है, तो इसकी सूचना पुलिस या चाइल्डलाइन को देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। मामले को जानते हुए भी छुपाना या रिपोर्ट न करना अपने आप में एक गंभीर अपराध है।
यह कानून आम कानूनों से अलग और बच्चों के प्रति अधिक संवेदनशील है
पॉक्सो कानून लड़का और लड़की दोनों पर समान रूप से लागू होता है। समाज में यह भ्रम है कि यह केवल लड़कियों के लिए है, जो कि गलत है।अपराध की गंभीरता के आधार पर अपराधी को कठोर कारावास, उम्रकैद और यहाँ तक कि मृत्युदंड तक की सज़ा हो सकती है।
पीड़ित बच्चे की पहचान (जैसे नाम, फोटो, स्कूल या पता) को मीडिया, सोशल मीडिया या किसी भी सार्वजनिक मंच पर उजागर करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है।
उन्होंने कहा कि इन मामलों की जल्द से जल्द सुनवाई के लिए 'विशेष पॉक्सो अदालतों' का गठन किया गया है, ताकि बच्चे को न्याय के लिए सालों का इंतज़ार न करना पड़े।बच्चों के अनुकूल कानूनी प्रक्रिया यह कानून सुनिश्चित करता है कि कानूनी कार्रवाई के दौरान बच्चे को किसी भी तरह का मानसिक तनाव या डर न झेलना पड़े:।
कहा कि अदालत में गवाही या सुनवाई के दौरान बच्चे का सामना सीधे आरोपी से नहीं कराया जाता। इसके लिए स्क्रीन या पर्दे का उपयोग किया जाता है।यदि आपको किसी भी बच्चे के साथ गलत होने का अंदेशा हो, तो आप इन माध्यमों से तुरंत मदद ले सकते हैं:
माध्यम हेल्पलाइन नंबर / लिंक विवरण
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 24 घंटे उपलब्ध मुफ्त राष्ट्रीय हेल्पलाइन, जो तुरंत बच्चे को रेस्क्यू और काउंसिलिंग देती है।आपातकालीन सेवा 112 / 100 /15100 किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत पुलिस सहायता के लिए है।
बताया कि पॉक्सो ई-बॉक्स (NCPCR) ncpcr.gov.in राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की वेबसाइट पर जाकर कोई भी ऑनलाइन गुप्त शिकायत दर्ज कर सकता है।
त्वरित न्याय इन मामलों की जल्द से जल्द सुनवाई के लिए 'विशेष पॉक्सो अदालतों' का गठन किया गया है, ताकि बच्चे को न्याय के लिए सालों का इंतज़ार न करना पड़े।
संतोष कुमार सामाजिक कार्यकर्ता सवेरा स्वयंसेवी संगठन के द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से संचालित सभी योजना के बारे में बताया गया lइस कार्यक्रम में विद्यालय के सभी छात्र छात्राएं एवं प्रधानाध्यापक-संजय कुमार सिंह, सहायक शिक्षक- अनिल कुमार सिंह,अभय शंकर, प्रभात कुमार, मो०मोजाहेदुल इस्लाम, पुष्पम कुमारी, अमृता कुमारी उपस्थित रहे l


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